वॉशिंगटन के गलियारों में बड़ा सियासी भूचाल!
ई राज
अमेरिकी राजनीति के सबसे चर्चित और रहस्यमयी सेक्स स्वैंâडल ‘जेप्रâी एपस्टीन मामले’ को लेकर वॉशिंगटन में जबरदस्त खींचतान जारी है। हाउस ओवरसाइट कमेटी के चेयरमैन जेम्स कोमर (रिपब्लिकन) ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए अमेरिका के न्याय विभाग को सीधी चुनौती दी है।
कोमर का दावा है कि उनकी कमेटी जल्द ही प्रॉसिक्यूटर्स को एक ऐसी ‘टू-डू लिस्ट’ (जांच की कार्यसूची) सौंपने जा रही है, जिसके बाद न्याय विभाग के पास बंद हो चुकी एपस्टीन जांच को दोबारा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। कोमर को पूरा भरोसा है कि उनके पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जो इस हाई-प्रोफाइल केस को फिर से खोलने पर मजबूर कर देंगे।
समन की बौछार और बड़े चेहरों पर कसता शिकंजा
मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब जांच कमेटी ने पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, हिलेरी क्लिंटन सहित जेप्रâी एपस्टीन के फाइनेंशियल्स और उनके जे.पी. मॉर्गन व डॉयचे बैंक खातों तक को समन भेज दिया। यही नहीं, पूर्व अटॉर्नी जनरल और एफबीआई के पूर्व निदेशकों से भी तीखे सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। हाल ही में ओबामा प्रशासन की पूर्व व्हाइट हाउस वकील वैâथरीन रूमलर से भी बंद कमरे में घंटों पूछताछ की गई है।
लेकिन क्या यह सिर्फ एक सियासी पैंतरा है? एक मीडिया हाउस द्वारा एक दर्जन से ज्यादा सांसदों और शीर्ष सूत्रों से की गई बातचीत ने इस दावे के पीछे के असली और उलझे हुए सच को बेनकाब कर दिया है! सूत्रों की मानें तो कोमर का यह आत्मविश्वास सिर्फ एक ‘राजनैतिक हथकंडा’ हो सकता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी बंद पड़ी आपराधिक जांच को दोबारा शुरू करवाने के लिए संसद की ‘टू-डू लिस्ट’ काफी नहीं होती। न्याय विभाग एक स्वतंत्र संस्था है और उस पर इस तरह का दबाव बनाना कानूनी रूप से लगभग असंभव है।
धमाके की उम्मीद या सिर्फ बयानबाजी?
जहां रिपब्लिकन सांसद इसे एपस्टीन के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मुहिम बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का मानना है कि यह केवल हेडलाइन्स बटोरने और चुनाव से पहले राजनीतिक विरोधियों को घेरने की कोशिश है। अब देखना यह होगा कि क्या कोमर की यह ‘टू-डू लिस्ट’ सचमुच न्याय विभाग की नींद उड़ाएगी, या फिर यह वॉशिंगटन का एक और बेअसर राजनीतिक नाटक साबित होगी!
