मुंबई में अभिनेत्रियों के नाम पर चल रहे गिरोह
फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में जगह बनाने का सपना लेकर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में युवतियां मुंबई पहुंचती हैं। इनमें से कुछ को काम मिलता है, लेकिन बहुत-सी युवतियां ऑडिशन, कास्टिंग, मॉडलिंग और वेब सीरीज में भूमिका दिलाने का दावा करने वाले एजेंटों के जाल में फंस जाती हैं। बीते कुछ वर्षों में मुंबई पुलिस ने ऐसे कई कथित देह व्यापार गिरोहों का भंडाफोड़ किया है, जिनमें अभिनेत्रियों, मॉडलों, कास्टिंग एजेंटों और मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। इन मामलों को देखते समय यह अंतर समझना बेहद जरूरी है कि पुलिस द्वारा किसी स्थान से छुड़ाई गई महिला आरोपी नहीं, बल्कि संभावित पीड़िता होती है। इसके विपरीत, गिरोह चलाने, महिलाओं को उपलब्ध कराने या उनकी कमाई पर निर्भर रहने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति की भूमिका अलग होती है।
गिरगांव के होटल से दो अभिनेत्रियां छुड़ाई गईं
जून २०२६ में मुंबई पुलिस ने गिरगांव के एक होटल में छापा मारकर कथित देह व्यापार गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस के अनुसार, वहां से दो अभिनेत्रियों को छुड़ाया गया। इनमें एक मराठी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं करने वाली अभिनेत्री और दूसरी बंगाली तथा हिंदी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं करने वाली कलाकार बताई गई। पुलिस ने कथित एजेंट को गिरफ्तार किया, जो फिल्मी हस्तियों के मेकअप आर्टिस्ट के रूप में भी काम करता था। मामले में आर्थिक लेन-देन और होटल प्रबंधन की भूमिका की जांच की जा रही है। दोनों अभिनेत्रियों की पहचान आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर कई प्रसिद्ध अभिनेत्रियों के नाम अनुमान के आधार पर चलाए गए, लेकिन किसी विश्वसनीय स्रोत ने उनकी पुष्टि नहीं की। ऐसी अटकलें निर्दोष महिलाओं की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
२०२५: संघर्षरत अभिनेत्रियों को फंसाने का आरोप
सितंबर २०२५ में मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस ने एक टेलीविजन अभिनेत्री को कथित रूप से देह व्यापार गिरोह चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वह फिल्म और टेलीविजन उद्योग में काम पाने के लिए संघर्ष कर रही महिलाओं को निशाना बनाती थी। कार्रवाई में दो महिलाओं को छुड़ाया गया और मानव तस्करी तथा अनैतिक व्यापार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
२०२३: एक ही सप्ताह में दो अभिनेत्रियों पर आरोप
अप्रैल २०२३ में मुंबई में फिल्म उद्योग से जुड़े कथित देह व्यापार के दो अलग-अलग मामले सामने आए थे। पहले मामले में अभिनेत्री और कास्टिंग डायरेक्टर आरती मित्तल को गोरेगांव क्षेत्र में कथित रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नकली ग्राहक भेजकर कार्रवाई की थी और दो मॉडलों को छुड़ाने का दावा किया था। आरोप था कि काम और पैसे का लालच देकर महिलाओं को ग्राहकों के पास भेजा जाता था। इसके कुछ दिन बाद भोजपुरी अभिनेत्री सुमन कुमारी को भी गोरेगांव के एक होटल से संचालित कथित गिरोह के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि संघर्षरत मॉडलों को देह व्यापार में धकेला जा रहा था। कार्रवाई के दौरान तीन महिलाओं को छुड़ाया गया और अनैतिक व्यापार निवारण कानून के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई। उसी वर्ष अंधेरी की एक सोसाइटी में पुलिस ने छापा मारकर एक मॉडल सहित तीन महिलाओं को छुड़ाया था। उस मामले में गिरोह चलाने की आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था।
२०२१: मॉडल गिरफ्तार, अभिनेत्रियां और मॉडल छुड़ाई गईं
अगस्त २०२१ में मुंबई पुलिस ने एक मॉडल को कथित देह व्यापार गिरोह चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, एक मॉडल और एक अभिनेत्री को छुड़ाया गया। जांच में यह आरोप सामने आया कि मनोरंजन उद्योग में संपर्क और काम दिलाने के नाम पर महिलाओं को ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। जनवरी २०२१ में जुहू के एक होटल में पुलिस ने कथित ‘कास्टिंग काउच’ गिरोह का पर्दाफाश किया था। एक कास्टिंग एजेंट सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और आठ मॉडलों को छुड़ाया गया। पुलिस का आरोप था कि फिल्मों और वेब सीरीज में अवसर दिलाने के बहाने संघर्षरत कलाकारों का शोषण किया जा रहा था।
२०२०: अभिनेत्री और इवेंट मैनेजर पर गिरोह चलाने का आरोप
जनवरी २०२० में गोरेगांव के एक होटल में मॉडल और अभिनेत्री अमृता धनोआ तथा एक इवेंट मैनेजर को कथित देह व्यापार गिरोह चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने नकली ग्राहक के माध्यम से जाल बिछाकर कार्रवाई करने का दावा किया था। इसी महीने अंधेरी पूर्व के एक होटल में पुलिस ने दो अभिनेत्रियों और एक नाबालिग को छुड़ाया था। पुलिस का कहना था कि महिलाओं को देह व्यापार के लिए मजबूर किया गया था। गिरोह चलाने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया गया था।
गिरोह कैसे काम करते हैं?
इन मामलों में कार्यप्रणाली लगभग एक जैसी दिखाई देती है। एजेंट पहले सोशल मीडिया, ऑडिशन समूहों, मॉडलिंग एजेंसियों या व्यक्तिगत संपर्कों के माध्यम से संघर्षरत कलाकारों तक पहुंचते हैं। शुरुआत में फोटो शूट, विज्ञापन, वेब सीरीज या फिल्मों में छोटी भूमिका दिलाने का भरोसा दिया जाता है। बाद में आर्थिक संकट, रहने के खर्च और काम न मिलने की मजबूरी का लाभ उठाकर उन्हें संदिग्ध ग्राहकों से मिलवाया जाता है। कई मामलों में होटल, किराये के फ्लैट, स्पा और ऑनलाइन एस्कॉर्ट सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ग्राहकों को महिलाओं की तस्वीरें मोबाइल पर भेजी जाती हैं और भुगतान नकद अथवा डिजिटल माध्यम से लिया जाता है। पुलिस आमतौर पर नकली ग्राहक भेजकर गिरोह तक पहुंचती है।
गरीबी ही नहीं, असुरक्षित रोजगार भी कारण
मनोरंजन उद्योग में नियमित नियुक्ति, निर्धारित वेतन और औपचारिक भर्ती व्यवस्था का अभाव है। हजारों कलाकार परियोजना-दर-परियोजना काम करते हैं। कई महीनों तक काम न मिलने के बावजूद उन्हें मुंबई में मकान, भोजन, यात्रा और पोर्टफोलियो का खर्च उठाना पड़ता है। इसी असुरक्षा का फायदा बिचौलिए उठाते हैं। हालांकि, आर्थिक परेशानी हर मामले की एकमात्र वजह नहीं होती। कहीं धोखा, कहीं दबाव, कहीं ब्लैकमेल और कहीं जल्दी पैसा कमाने का लालच भी भूमिका निभाता है। इसलिए प्रत्येक मामले को उसकी परिस्थितियों और प्रमाणों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
सनसनी नहीं, पीड़ितों की गरिमा जरूरी
ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में सबसे बड़ी समस्या यह है कि छुड़ाई गई महिलाओं को भी ‘सेक्स रैकेट में पकड़ी गई अभिनेत्री’ लिख दिया जाता है। इससे आरोपी और पीड़िता के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है। पुलिस द्वारा बचाई गई महिला की पहचान प्रकाशित करना उसके पुनर्वास, परिवार और भविष्य के रोजगार पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। मीडिया को गिरफ्तार व्यक्ति, आरोप, पुलिस कार्रवाई और न्यायिक स्थिति स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए। वहीं पीड़ित महिलाओं के नाम, तस्वीरें या संकेत देने वाली जानकारी प्रकाशित करने से बचना चाहिए। बार-बार सामने आ रहे ये मामले केवल फिल्म जगत की चकाचौंध के पीछे छिपी कहानी नहीं हैं। ये अनियमित रोजगार, फर्जी कास्टिंग एजेंसियों, मानव तस्करी और कमजोर पुलिस निगरानी की संयुक्त विफलता को उजागर करते हैं। जरूरत केवल छापेमारी की नहीं, बल्कि कास्टिंग एजेंटों का पंजीकरण, होटल संचालकों की जवाबदेही, ऑनलाइन विज्ञापनों की निगरानी और संघर्षरत कलाकारों के लिए सुरक्षित शिकायत प्रणाली बनाने की है।
