मुख्यपृष्ठनए समाचार‘महायुति’ का हाल बेहाल; नहीं मिली उधार में दाल!

‘महायुति’ का हाल बेहाल; नहीं मिली उधार में दाल!

-व्यापारियों ने कहा, ‘पहले पैसे दो फिर दाल लो’…बाढ़ग्रस्त किसानों को राहत किट में देना था अनाज…चावल-गेहूं का सरकार ने कर लिया था जुगाड़

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में महायुति सरकार की आर्थिक साख अब बाजार में बेहाल हो गई है। हालात ये हैं कि अतिवृष्टि से तबाह किसानों और बाढ़ पीड़ितों को राहत के तौर पर तीन किलो तुअर दाल देने की सरकारी घोषणा भी अब मजाक बनकर रह गई है। इसका कारण है कि सरकार के पास पैसा नहीं है और वह व्यापारियों से उधार में दाल मांग रही है। मगर व्यापारी उधार में दाल देने को तैयार ही नहीं हैं। स्थानीय व्यापारियों ने साफ कह दिया है ‘बिना नकद या लिखित गारंटी के उधारी पर एक दाना भी नहीं मिलेगा!’

५२,४१४ परिवारों को देना है अनाज
अगस्त और सितंबर में महाराष्ट्र के कई जिलों मराठवाड़ा, नासिक, जलगांव और सोलापुर में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने कहर बरपाया। हजारों गांव पानी में डूबे, खेत तबाह हुए, घर उजड़ गए। इसके बाद सरकार ने ५२,४१४ प्रभावित परिवारों को राहत देने का एलान किया, जिसमें १० किलो चावल, १० किलो गेहूं और ३ किलो तुअर दाल शामिल थे। चावल और गेहूं तो किसी तरह बांट दिए गए, लेकिन अब तुअर दाल पर आकर सरकार की आर्थिक असलियत सामने आ गई है।

वादा नहीं, लिखित में बताओ, पैसा कब दोगे?
सरकार को बाढ़ग्रस्त परिवारों को अनाज देना है। मगर खाली सरकारी खजाना के कारण काफी मुश्किलें आ रही हैं। सरकार उधार लेना चाहती है, पर व्यापारियों ने साफ कह दिया है कि वादा नहीं, लिखित में बताओ कि पैसा कब दोगे? सरकार को गेहूं, चावल और दाल देना है। प्रशासन को निर्देश मिला कि तुअर दाल तुरंत स्थानीय स्तर पर खरीदी जाए, लेकिन व्यापारियों ने दो टूक कह दिया, ‘सरकार बताए, भुगतान कब होगा? वादा नहीं, लिखित भरोसा चाहिए।’
सरकार की ओर से कहा गया ‘दाल भेजो, बाद में बिल भेजो, पैसा मिल जाएगा।’ इसी असमंजस में तुअर दाल का एक दाना भी बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पाया है और प्रशासन मजबूरी में हाथ फैलाए खड़ा है। किसानों की फसलें पहले ही पानी में समा गर्इं, खेतों की मिट्टी बह गई और अब रबी की बुवाई पर भी संकट है। जिनके घर उजड़ गए, उनके सामने दो जून की रोटी का सवाल खड़ा है और सरकार अभी तक सिर्फ कागजी घोषणाओं में उलझी है।
अब सवाल है कि क्या सरकार को खुद पर भरोसा नहीं है, जो वह बाजार में गारंटी नहीं दे पा रही? क्या यह वही ‘डबल इंजिन’ सरकार है जो हर आपदा में राहत की बात करती है? और सबसे अहम बात कि बाढ़ पीड़ितों की थाली में खाना कब पहुंचेगा?

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