-सिर्फ बैठकों और घोषणाओं में उलझी सरकार
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महायुति सरकार की बहुप्रचारित युवा नीति अब फाइलों में दब कर रह गई है। राज्य की संसोधित नई युवा नीति तैयार करने के लिए गठित समिति को तीन माह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद काम अधूरा ही रह गया। नतीजतन, महायुति सरकार को समिति की अवधि छह महीने और बढ़ानी पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, लगातार बैठकों और घोषणाओं के बावजूद नीति निर्माण की प्रक्रिया फाइलों और औपचारिकताओं में उलझकर रह गई है। वहीं, अब समिति में एक युवा महिला विधायक सना नवाब मलिक को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन इस कवायद से भी नीति तैयार होने की रफ्तार में कोई खास सुधार होता नहीं दिख रहा।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष २०१२ की पुरानी युवा नीति की समीक्षा कर नया और संशोधित युवा नीति मसौदा तैयार करने का दावा किया था। इसके लिए क्रीड़ा व युवक कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में समिति का गठन २८ मई २०२५ को किया गया था, जिसे तीन महीने की समयसीमा दी गई थी। मगर नीति निर्माण का काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। सूत्रों के अनुसार समिति की बैठकों में समन्वय की कमी, विभागीय मतभेद और तकनीकी विलंब के चलते प्रक्रिया थम-सी गई है। परिणामस्वरूप सरकार को अब समिति की अवधि छह महीने तक बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा है। अवधि बढ़ाए जाने को लेकर कल बाकायदा सरकारी आदेश जारी किया गया है। दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि युवा नीति का ड्राफ्ट अभी प्रारूप अवस्था में है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की नीतिगत सुस्ती और युवाओं के प्रति उदासीनता का प्रमाण बता रहा है।
युवाओं को लेकर गंभीर नहीं है सरकार
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर महायुति सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए युवा नीति सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह गई है। सरकार की यह ढिलाई युवाओं के साथ विश्वासघात के समान है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि समिति में बार-बार विस्तार और औपचारिक सदस्यता बढ़ाने की कवायद असल काम को आगे बढ़ाने के बजाय सिर्फ दिखावा और समय निकालने की कोशिश भर साबित हो रही है।
