-अवैध वाहनों से स्कूली छात्र कर रहे हैं सफर
-नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
-परिवहन विभाग बना धृतराष्ट्र
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई शहर और उपनगरों में छात्रों को सरकारी स्कूल बसों की बजाय अवैध निजी वाहनों में ले जाया जा रहा है। वैध लाइसेंस न होने, स्कूल बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने और क्षमता से अधिक छात्रों को रिक्शा या टैक्सियों में ले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इन वाहनों में अग्निसुरक्षा उपकरण, प्राथमिक उपचार सामग्री, दवाइयां, छात्रों के बैग और अन्य स्कूल सामग्री रखने की जगह नहीं होती। इससे छात्रों की जान जोखिम में पड़ रही है। यानी महायुति सरकार में छात्रों की सुरक्षा को लेकर खिलवाड़ किया जा रहा है।
बता दें कि कामकाजी अभिभावकों के पास समय नहीं होता इसलिए वे अपने बच्चों को स्कूल बसों में स्कूल भेजते हैं। कई अभिभावक स्कूल बसों का मासिक किराया वहन नहीं कर सकते इसलिए वे अपने बच्चों को स्कूल बसों से भेजने की जगह अनधिकृत वाहनों का विकल्प चुन रहे हैं, जो छात्रों के लिए खतरा पैदा कर रहा है। निजी ट्रांसपोर्टर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जो छात्रों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सबसे मजेदार बात यह है कि परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की अक्षमता के कारण सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर स्कूली बच्चों को अवैध वाहनों से सफर कराया जा रहा है।
वैन में ये चीजें हैं जरूरी
जीपीएस, डैशबोर्ड पर सीसीटीवी और स्क्रीन, फायर एलार्म सिस्टम, दरवाजा खुला रहने पर एलार्म सिस्टम, ४० किमी प्रति घंटे की गति सीमा वाली स्पीड, पैनिक बटन, आपातकालीन दरवाजे, स्कूल वैन में छोटे छात्रों के प्रवेश के लिए सीढ़ियां, वाहन की छत पर स्कूल के नाम आदि का समावेश है।
