मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : ईरान के ट्रैप में फंसते ट्रंप!

मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान के ट्रैप में फंसते ट्रंप!

सूफी खान
४० दिनों तक अमेरिका और इजरायल से जंग लड़ने के बाद और सीजफायर में अपनी पोस्टवॉर डिप्लोमेसी को तेजी से आगे बढ़ाकर ईरान ने मिडिल ईस्ट को दो भागों में बांट दिया है। दो फाड़ हो गया है मिडिल ईस्ट, एक तरफ कतर और ओमान जैसे मुल्क हैं तो दूसरी तरफ यूएई और सऊदी अरब।
ईरान ओमान को समझाने में काफी हद तक कामयाब रहा है कि आगे जाकर होर्मुज का फायदा उसे मिलेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का एक किनारा ओमान से मिलता है। कतर ईरान को एक बड़ी रकम देकर जो ईरान का ही पुराना हिसाब था इस जंग से हट गया है। वो अपने हित देख रहा है,अपना कारोबार देख रहा है। देखा जाए तो ईरान ने अपनी कूटनीति से गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल या जीसीसी के देशों को बांट दिया है। ओमान, कतर जैसे देश ईरान के फेवर में नजर आ रहे हैं। वहीं सऊदी और यूएई, बहरीन चाहते हैं कि अमेरिका ईरान को सबक सिखाए, वरना आगे चलकर ईरान एक बड़ा खतरा बनेगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान ने होर्मुज को प्रâंट पर रखा है और लगातर प्रेशर बना रहा है। इसका असर भी हो रहा है। ट्रंप के बयानों को अगर समझा जाए तो पता चलता है कि ट्रंप की अब पूरी कोशिश है कि होर्मुज खुल जाए दोनों तरफ से। उन्होंने भी ईरान के साथ न्यूक्लियर वाली शर्त फिलहाल ताक पर रख दी है और ईरान के ट्रेप में फंसकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ही सारा ध्यान केंद्रित कर लिया है।
दरअसल, ईरान अपने दोस्त अरब मुल्कों को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि हमारी लड़ाईयां अपनी जगह हैं लेकिन अमेरिका वहां रहेगा तो आप नुकसान में रहेंगे। लेकिन इतना तो पक्का है कि आज नहीं तो कल अपने कारोबारी फायदे के लिए जीसीसी के देशों को ईरान से सुलह समझौता करना ही पड़ेगा, बीच का रास्ता निकालना ही पड़ेगा। ओमान में तो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज से जुड़े देशों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह रास्ता सुरक्षित रहे, क्योंकि इससे पूरी दुनिया को फायदा होता है। खबर तो ये भी आती रहती हैं कि ईरान अमेरिका से बातचीत में भी आगे ईरान अमेरिकन कंपनियों को कुछ हद तक छूट और तेल के मामले में राहत दे सकता है।

अंधे को क्या चाहिए दो आंखें…!
अमेरिका ठहरा व्यापारी देश, अंधे को क्या चाहिए दो आंखें…! इस स्थिति में अमेरिका ही इजरायल और खित्ते के दीगर मुल्कों को समझा लेगा कि ईरान के साथ वैâसे डील करना है। जानकार कहते हैं कि ईरान की कूटनीतिक कोशिशों से अगर अरब के गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल मुल्कों में फूट पड़ती है और सब उससे अलग-अलग तरीके से समझौते कर पाते हैं तो ये एक बड़ी कामयाबी होगी। इसमें कोई शक नहीं कि बातचीत की टेबल पर भी ईरान मजबूत है और ऐसा लगता है जैसे वक्त इस बार उसके साथ है।

 

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