मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की लापरवाही का नतीजा ... कांदिवली शताब्दी अस्पताल में ईसीजी विभाग...

मनपा की लापरवाही का नतीजा … कांदिवली शताब्दी अस्पताल में ईसीजी विभाग बंद! …टेक्नीशियन गायब, दांव पर मरीजों की जिंदगी

मालाड-बोरिवली भेजे जा रहे मरीज

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर मनपा की लापरवाही का नतीजा भुगत रही है। शहर का कांदिवली शताब्दी अस्पताल इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है, जहां ईसीजी विभाग बंद चल रहा है। इस विभाग का टेक्नीशियन गायब है, जिसके चलते मरीजों की जिंदगी सीधे दांव पर लगी हुई है। हृदय रोगियों को मालाड-बोरिवली अस्पतालों में भेजा जा रहा है। इस वजह से उन्हें भटकाव और देरी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या कोई अचानक उभरी नहीं है, बल्कि मनपा अस्पतालों में खाली पदों ने संकट बढ़ाया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि १८ हजार की ठेकेदारी नौकरी पर कोई तैयार नहीं है, जो प्रशासनिक उदासीनता और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की पोल खोल रही है। मुंबई मनपा के उपनगरीय अस्पतालों में कई पद खाली हैं, जिसका असर मरीज सेवा पर हो रहा है।
कांदिवली शताब्दी अस्पताल में ईसीजी टेक्नीशियन के दो पद मंजूर हैं, जिनमें से एक पद भरा हुआ है इसलिए अस्पताल में सिर्फ सुबह की शिफ्ट में ही मरीजों का ईसीजी किया जा रहा था। रात की ड्यूटी में ईसीजी डॉक्टर और नर्सों की मदद से किया जाता था। अब टेक्नीशियन के अवकाश पर जाने से ईसीजी विभाग पूरी तरह बंद हो गया है। ऐसे में ओपीडी में इलाज के लिए आनेवाले मरीजों का ईसीजी नहीं किया जा रहा है। इन मरीजों को मालाड के देसाई अस्पताल या बोरिवली के भगवती अस्पताल भेजा जा रहा है। कुछ मरीजों को बाहर निजी क्लीनिक से ईसीजी कराने की सलाह भी दी जा रही है। इससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने से इनकार
मुंबई मनपा के उपनगरीय अस्पतालों में एक्स-रे, ईसीजी टेक्नीशियन के पद कॉन्ट्रैक्ट आधार पर भरने की व्यवस्था है, लेकिन ईसीजी टेक्नीशियन का मासिक वेतन केवल १८ हजार रुपए होने के कारण कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने के लिए बहुत कम लोग तैयार हो रहे हैं। यह जानकारी खुद मनपा के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दी।

वर्तमान में कार्यरत ईसीजी टेक्नीशियन मातृत्व अवकाश पर गई हैं इसलिए ओपीडी के मरीजों का ईसीजी नहीं किया जा रहा है। हालांकि, वार्ड में भर्ती मरीजों और इमरजेंसी विभाग के मरीजों का ईसीजी डॉक्टर और नर्सों की मदद से किया जा रहा है।
डॉ. अजय गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, कांदिवली शताब्दी अस्पताल

अन्य समाचार