-चुनाव आयोग को एक प्रत्याशी का पत्र
-फूटने के डर से दलों ने दिया है छिपा
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले ११ स्वायत्त संस्थाओं में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ज्यादातर स्वायत्त संस्थाओं में नगरसेवक गायब नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि कहीं वे किडनैप हो चुके हैं तो कहीं उन्हें रिसोर्ट में भेजा गया है। तो कुछ फाइव स्टार होटल का लुत्फ ले रहे हैं। खरीद-फरोख्त की डर से भाजपा और कांग्रेस समेत बड़े दलों ने नगरसेवकों को सीक्रेट जगह पर छुपा रखा है। ऐसे में कई दल के प्रत्याशी प्रचार के लिए नगरसेवकों को ढूंढ रहे हैं।
ऐसे में वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रत्याशी प्रशांत इंगोले ने चुनाव अधिकारी को पत्र देकर मांग की है कि मुझे प्रचार करना है। बताएं नगरसेवक कहां गए? जब तक नगरसेवक नहीं मिलते, तब तक प्रचार कहां किया जाएगा? ऐसा सवाल उठाते हुए उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया।
बोली लग रही
वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार ने आरोप लगाया कि नांदेड़ स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के कई नगरसेवकों को गोवा, गुवाहाटी, कोकण और तिरुपति जैसे स्थानों पर ले जाने की चर्चाएं हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को ‘सैर-सपाटे’ पर भेजना आचार संहिता का उल्लंघन है और यह लोकतंत्र का खुला अपमान है। इंगोले ने कहा कि आज हालत ऐसी हो गई है कि जनप्रतिनिधियों की बोली लगाई जा रही है। उन्हें टोकन राशि देकर इधर-उधर ले जाया जा रहा है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता के बल पर जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश है।
