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“संघर्ष कभी खत्म नहीं होता — यही हमें जिंदा और बढ़ते रहने देता है,”: सानंद वर्मा

हिमांशु राज

सानंद वर्मा, जिन्होंने टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में सक्सेना जी का किरदार निभाकर दिल जीता, जीवन और अभिनय में संघर्ष को सफलता की नींव मानते हैं। उन्होंने फिल्मों जैसे बबल्ली बाउंसर, पटाखा, मर्दानी, रेड और छिछोरे में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। उनके लिए अभिनेता का सफर कभी खत्म नहीं होने वाला संघर्ष है, जो उन्हें जीवित और निरंतर बेहतर बनाने का कारण है।

सानंद कहते हैं कि उनके लिए दो किरदार खास हैं—दुबे जी (अफरान) और सैक्सेना जी (भाभीजी घर पर हैं)। दुबे जी का रोल चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वे असल में उनसे बहुत अलग हैं, जबकि सैक्सेना जी उनके दिल के करीब है। अफरान में 12 एपिसोड की लोकप्रियता ने भाभीजी के हजारों एपिसोड की प्रसिद्धि के बराबर मान हासिल की।

उन्होंने कहा कि बॉलीवुड और जीवन दोनों में संघर्ष हमेशा बना रहता है। हालाँकि उन्हें प्यार और पहचान मिली है, पर वे मानते हैं कि उनकी सबसे अच्छी भूमिका अभी आनी बाकी है। सानंद ने फिल्म उद्योग के बदलते स्वरूप पर भी अपनी राय दी, जहाँ पहले फिल्में जुनून से बनती थीं, जबकि अब कॉर्पोरेट प्रोफेशनलिज्म का प्रभाव अधिक है।

फिल्मों में कैरेक्टर कलाकारों की अहमियत बढ़ी है और अब उन्हें ज्यादा सम्मान और दृश्यता मिल रही है। सानंद के अनुसार, जीवन और अभिनय में स्थिरता, नम्रता और अपने हुनर के प्रति सच्चाई सबसे जरूरी हैं। सोशल मीडिया और शोहरत अस्थायी हैं, जबकि आत्मशांति और प्रतिभा ही जीवन की असली पूंजी हैं। यह संदेश उनके संघर्ष और सफलतापूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा को दर्शाता है।

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