मुख्यपृष्ठस्तंभदेश में बात-बात पर पारा ५० पार!

देश में बात-बात पर पारा ५० पार!

अनिल तिवारी

देश में गर्मी सिर्फ मौसम में नहीं, मिजाज में भी चढ़ी हुई है। हालत यह है कि कहीं बिजली गई तो नेता जी की प्रतिष्ठा चली गई, कहीं जनगणना कर्मी पड़ोसी का घर पूछ बैठे तो गोली चल गई और कहीं शादी में डांस का मान-सम्मान बिगड़ा तो दूल्हे राजा ने ससुर को थप्पड़ मारकर अपनी ही बारात की अर्थी निकाल दी। सचमुच, गजबे गुस्सा बा!
चंदौली में बिजली कटौती ने जनता ही नहीं, भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष महेंद्र सेठ का घरेलू सम्मान भी संकट में डाल दिया। पत्नी ने ताना मारा, ‘खाक भाजपा नेता हो, बिजली नहीं दिला पा रहे।’ बस फिर क्या था, नेताजी बिजली उपकेंद्र पहुंचे और ताला जड़ दिया। लोकतंत्र में बिजली भले न आए, मगर गुस्सा फुल वोल्टेज पर जरूर आता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर दो पर तो आस्था और अनुशासन की भिड़ंत में दांत कांड हो गया। दक्षिण भारतीय महिला श्रद्धालु को महिला पुलिसकर्मी ने रोका, तो बात इतनी बढ़ी कि श्रद्धालु ने दांतों से काट लिया। अब पुलिसकर्मी अस्पताल में है और श्रद्धालु हिरासत में। दर्शन की जल्दी में भक्तिभाव कब दंत-प्रहार बन जाए, कहना कठिन है।
गाजियाबाद के मुरादनगर में जनगणना सर्वे भी बारूदी बन गया। एक व्यक्ति ने पड़ोसी का घर बता दिया, तो आरोपी इतना नाराज हुआ कि गोली मार दी। अब जनगणना कर्मियों को घर पूछने से पहले शायद बुलेटप्रूफ जैकेट भी दी जानी चाहिए।
रायबरेली में राजनीति का पारा अलग चढ़ा है। कांग्रेसियों ने राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह के खिलाफ तहरीर दी है। आरोप है कि उन्होंने राहुल गांधी का गला दबाने जैसी टिप्पणी की। राजनीति में अब बहस, बयान और बवाल के बीच भाषा भी लाठी-डंडे वाली होती जा रही है।
पंजाब की कपूरथला जेल में वैâदियों ने छत पर चढ़कर उत्पात मचाया, आग लगाने की कोशिश हुई और गोली चलने की भी सूचना आई। यानी जेल के भीतर भी अनुशासन छुट्टी पर है। बाहर जनता भड़की है, भीतर बंदी भड़के हैं।
लखीमपुर खीरी में तो रिश्तेदारी ही रणभूमि बन गई। दामाद कमल ने ससुर की लाठी से पीटकर हत्या कर दी और वीडियो बनाकर कहा कि होशो-हवास में बदला लिया। यह घटना बताती है कि परिवारों में संवाद की जगह जब प्रतिशोध ले लेता है, तो घर शोकसभा बन जाते हैं।
बंगाल में साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगा वह स्टैच्यू गिरा दिया गया, जिसका ममता बनर्जी से खास संबंध बताया जा रहा है। अब मूर्तियां भी राजनीतिक गुस्से की मार झेल रही हैं।
हमीरपुर में दूल्हे ने द्वारचार के बीच ससुर को थप्पड़ मारा, तो दुल्हन ने शादी का जोड़ा फेंककर बारात लौटा दी। यह घटना दूल्हों के लिए संदेश है, शादी में घोड़ी पर बैठना आसान है, संस्कार पर टिकना कठिन।
अयोध्या में राम मंदिर दर्शन करने आए श्रद्धालु की पिटाई और गाड़ी तोड़ने का मामला भी सामने आया। कट मारने की मामूली बात लाठी-डंडे तक पहुंच गई। कुल मिलाकर देश में गुस्सा अब व्यक्तिगत संपत्ति नहीं, सार्वजनिक महामारी बन चुका है। बिजली हो, दर्शन हो, जनगणना हो, शादी हो, राजनीति हो या सड़क-हर जगह संयम का फ्यूज उड़ चुका है। लगता है अब सरकार को तापमान के साथ-साथ ‘जनता का गुस्सा सूचकांक’ भी जारी करना चाहिए।

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