युद्ध रुकते नहीं, केवल मोर्चे बदलते हैं
यूक्रेन के डीनीप्रो, जापोरिझिया और खारकीव पर रूसी मिसाइलों, ड्रोन और ग्लाइड बमों के ताजा हमलों में कम से कम दस लोगों की मौत ने एक बार फिर साबित किया है कि यूरोप का यह युद्ध थमने के बजाय अधिक तकनीकी और विनाशकारी होता जा रहा है। यूक्रेन अब यूरोप से केवल हथियार नहीं, बल्कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को रोकने वाली प्रभावी हवाई रक्षा प्रणाली मांग रहा है। दूसरी ओर रूस भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। परिणाम यह है कि कूटनीति की प्रत्येक पहल नए हमलों के शोर में दब जाती है।
दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा फिर युद्धभूमि बन गई है। पाकिस्तान आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है, जबकि अफगान पक्ष नागरिक बस्तियों पर बमबारी का आरोप लगा रहा है। जब आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई में बच्चे, महिलाएं और सामान्य नागरिक मारे जाते हैं, तो सैन्य अभियान की वैधता पर स्वाभाविक प्रश्न उठते हैं। यह टकराव केवल दो देशों का विवाद नहीं; इससे कट्टरपंथ, शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है।
म्यांमार में सैन्य शासन और सशस्त्र विद्रोही समूहों का गृहयुद्ध समाप्त नहीं हुआ है। लाखों लोग विस्थापित हैं और नागरिक हवाई हमलों, जबरन भर्ती तथा मानव तस्करी के बीच फंसे हैं। हैती में राज्य की जगह सशस्त्र गिरोहों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है; अस्पतालों तक को बंद करना पड़ा और लाखों लोग घर छोड़ चुके हैं।
युद्ध की आग में झुलसती दुनिया
आज की दुनिया में समस्या केवल युद्धों की संख्या नहीं, बल्कि उनका सामान्य हो जाना है। शक्तिशाली देश अपने हितों के अनुसार, किसी संघर्ष को ‘आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई’, किसी को ‘आत्मरक्षा’ और किसी को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ बताते हैं। लेकिन हर मोर्चे पर मरने वाला सबसे पहले सामान्य नागरिक ही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएं अपीलें कर रही हैं, पर निर्णायक शक्तियां स्वयं संघर्षों की पक्षकार या संरक्षक बन चुकी हैं। यही कारण है कि युद्ध रुक नहीं रहे, वे केवल सीमाएं और नाम बदल रहे हैं।
अमेरिका-ईरान में बातचीत, लेकिन खतरा बरकरार
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान ने फिलहाल हमले रोककर बातचीत बहाल करने की सहमति जताई है, लेकिन इसे शांति समझना जल्दबाजी होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव, जहाजों पर हमले और ईरान, इजरायल, अमेरिका तथा क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों की परस्पर कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। इजरायल-हिज्बुल्लाह संघर्ष में कमी आई है, लेकिन युद्धविराम अभी भी नाजुक है। गाजा और पश्चिमी तट की मानवीय स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। अफ्रीका के युद्ध अपेक्षाकृत कम सुर्खियां पाते हैं, लेकिन उनकी मानवीय कीमत कहीं अधिक है। सूडान में सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच लड़ाई एल ओबेद और दारफुर जैसे क्षेत्रों में नागरिकों को लगातार विस्थापित कर रही है। संयुक्त राष्ट्र ने नई सैन्य वृद्धि से हजारों लोगों की जान को खतरा बताया है। पूर्वी कांगो में सेना और एम२३ विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है तथा कांगो ने रवांडा की कथित भूमिका को लेकर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
