सामना संवाददाता / नई दिल्ली
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने फांसी की सजा सुना दी है। कोर्ट ने उन्हें क्रूरता का दोषी बताते हुए सजा-ए-मौत दी। इसके अलावा पूर्व गृहमंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन को भी सजा दी है। इस पैâसले को शेख हसीना ने पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है।
दरअसल, सजा सुनाए जाने के कुछ ही मिनट बाद जारी एक बयान में शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी ने कहा कि उन्हें मौत की सजा देने का आह्वान अंतरिम सरकार के भीतर चरमपंथी लोगों की निर्लज्ज और उनके जानलेवा इरादे को उजागर करता है। शेख हसीना ने कहा है कि अंतरिम सरकार द्वारा उनके खिलाफ मौत की सजा की सिफारिश इस बात का संकेत है कि अंतरिम सरकार के चरमपंथी तत्व बांग्लादेश की अंतिम निर्वाचित प्रधानमंत्री को समाप्त करना चाहते हैं और साथ ही अवामी लीग को एक राजनीतिक शक्ति के रूप में खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और उन्हें ऐसे पैâसलों की परवाह नहीं है। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल के पैâसले से अपने समर्थकों को भेजे एक ऑडियो मैसेज में अवामी लीग की नेता ने कहा कि यूनुस की अंतरिम सरकार उनकी पार्टी को खत्म करना चाहती है।
शेख हसीना ने आगे कहा कि उन्हें पैâसला सुनाने दीजिए। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। अल्लाह ने मुझे जिंदगी दी है, अल्लाह इसे छीन भी लेगा, लेकिन मैं अपने देश के लोगों के लिए काम करती रहूंगी। मैंने अपने माता-पिता, अपने भाई-बहनों को खोया है और उन्होंने मेरा घर जला दिया है। ऐसे अदालती पैâसले उन्हें नहीं रोक पाएंगे।
