मुख्यपृष्ठसमाचारट्रेड यूनियनों ने सही लेबर पॉलिसी के लिए आयुक्तालय पर प्रोटेस्ट किया

ट्रेड यूनियनों ने सही लेबर पॉलिसी के लिए आयुक्तालय पर प्रोटेस्ट किया

-ट्रेड यूनियनों ने की कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए हरियाणा पैटर्न लागू करने की मांग की

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र की अलग-अलग ट्रेड यूनियनों ने आज मुंबई के बांद्रा में लेबर आयुक्तालय ऑफिस पर हजारों की संख्या में प्रोटेस्ट मार्च निकाला। उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र के मेहनती और मेहनती वर्कर्स, जो कई सालों से अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, उनके लिए भी खेती, हेल्थ, एजुकेशन वगैरह की अलग-अलग पॉलिसी की तरह ही एक पॉलिसी बनाई जाए और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट-फ्री सर्विस के लिए हरियाणा पैटर्न लागू किया जाए। इस बड़े मार्च में घरेलू, कंस्ट्रक्शन, आंगनवाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स, रिक्शा टैक्सी ड्राइवर, रेहड़ी-पटरी वाले, बीड़ी वर्कर्स, पानी की सर्विस, नगर पालिकाओं, ग्रामीण बैंकों, पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे प्रोटेक्शन, मथाडी, ST कॉर्पोरेशन, हॉस्पिटल वगैरह से करीब 10,000 वर्कर्स ने हिस्सा लिया।
पिछले कई सालों से सरकार राज्य में ऑर्गनाइज्ड और अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स के हक की मांगों को नजरअंदाज़ कर रही है। चाहे सही मिनिमम वेज और पेंशन हो, या इंश्योरेंस कवर, बोनस और ग्रेच्युटी, कई मुद्दे हमेशा पेंडिंग रहते हैं और अलग-अलग जगहों के मालिक लगातार मज़दूरों का शोषण कर रहे हैं। सरकार का ध्यान इस ओर खींचने के लिए लेबर कमिश्नरेट पर यह प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। इस मार्च को भारतीय मज़दूर संघ के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी श्री सुरेंद्र पांडे, स्टेट प्रेसिडेंट एडवोकेट अनिल धुमाने और जनरल सेक्रेटरी किरण मिलगीर ने लीड किया। इस मौके पर डोमेस्टिक वर्कर्स यूनियन, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फेडरेशन, RCF वर्कर्स यूनियन, इलेक्ट्रिसिटी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन, ASHA और ग्रुप प्रमोटर सेविका संघ जैसे अलग-अलग लेबर यूनियनों का एक डेलीगेशन लेबर मिनिस्टर नामदार आकाशजी फुंडकर से मिला और उन्हें 32 मांगें सौंपीं। इन मांगों में महाराष्ट्र में मज़दूरों की पॉलिसी बनाना, कॉन्ट्रैक्ट मज़दूरों के लिए हरियाणा पैटर्न लागू करना, हर ज़िले में मज़दूरों का सरकारी अस्पताल शुरू करना, कंस्ट्रक्शन मज़दूर बोर्ड में भ्रष्टाचार की जांच करना, आशा और आंगनवाड़ी मज़दूरों को कर्मचारी का दर्जा देना, राज्य में APSS के 95 पेंशनरों को हर महीने 3,000 रुपये देना, घर-गृहस्थी बोर्ड योजनाएं शुरू करना वगैरह शामिल थीं। इस मार्च को संबोधित करते हुए जनरल सेक्रेटरी श्री सुरेंद्र जी पांडे ने कहा, ‘राज्य सरकार को मज़दूरों के मुद्दे पर सेंसिटिव होने की ज़रूरत है और कई राज्यों में सरकार की असंवेदनशीलता की वजह से मज़दूरों का गुस्सा भड़क गया है। सरकार ने महाराष्ट्र से अपील की कि ऐसी स्थिति न आए, इसका ध्यान रखे और मज़दूरों को लेबर कोड एक्ट का सीधा फ़ायदा दिलाने का इंतज़ाम करे। ‘
वहीं, मज़दूर संघ के प्रेसिडेंट एडवोकेट अनिल धुमाने ने कहा, ‘राज्य में मजदूरों के सेंसिटिव मुद्दे कई सालों से सरकार के पास पेंडिंग हैं और उन पर फ़ॉलो-अप करने के बावजूद, सरकार ने हमेशा उन्हें नजरअंदाज किया है, इसलिए यह प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया है, इसीलिए सरकार से अपील की है कि समय रहते इस पर ध्यान दें और मज़दूरों के साथ हो रहे अन्याय को दूर करें। लेबर मिनिस्टर आकाशजी फुंडकर ने भरोसा दिलाया कि लेबर यूनियनों की इन मांगों पर तुरंत विचार किया जाएगा, और मज़दूरों के इन पेंडिंग मुद्दों को हल करने के लिए इंडस्ट्री से जुड़े सभी मंत्रियों की मीटिंग मुख्यमंत्री की मौजूदगी में की जाएगी।

अन्य समाचार