-`अमेरिका फर्स्ट’ से कब सीख लेगी मोदी सरकार
उमन गुप्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक मंचों पर भारत के साथ दोस्ती की बात जरूर करते हैं, लेकिन उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति कई बार भारत के हितों के खिलाफ दिखाई देती है। अमेरिका अब भारत को केवल रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि आर्थिक प्रतिस्पर्धी के रूप में भी देखने लगा है। वर्ष २०२५ में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर ५० फीसदी तक का भारी टैरिफ लगाया था। इसमें २५ फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ और २५ फीसदी अतिरिक्त पेनल्टी भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण लगाई गई। इसे अमेरिका के सख्त कारोबारी रवैये का संकेत माना गया। अब मई २०२६ में ट्रंप प्रशासन ने एच-१बी वीजा नियमों और फीस को और कठोर बना दिया है। इस पैâसले का सबसे ज्यादा असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ रहा है। यह कदम ट्रंप की इमिग्रेशन सीमित करने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हाल ही में भारत मंडपम में आयोजित अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के २५०वें स्थापना समारोह में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि भारत उन पर ‘१०० फीसदी भरोसा’ कर सकता है। हालांकि, विदेश नीति विशेषज्ञ इसे केवल कूटनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का रवैया हमेशा कारोबारी हितों से प्रेरित रहा है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान के प्रति नरम नीति भी भारत के लिए चिंता बढ़ा रही है। अमेरिका पाकिस्तान को मध्य-पूर्व रणनीति में अहम भूमिका देना चाहता है, जिसे भारत संदेह की नजर से देख रहा है।
