मिडटर्म चुनाव में करारी हार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के बदले तेवर, बोले- अगर संभव हुआ तो ईरान को और तबाह नहीं करना चाहूंगा; उपराष्ट्रपति वेंस ने भी युद्ध को हार की वजह माना
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान के बीच अब ट्रंप ईरान पर हमले को लेकर पहले जैसी आक्रामक भाषा बोलने से बचते दिखाई दे रहे हैं। जिस ईरान को मिट्टी में मिलाने और तबाह करने की धमकियां वे लगातार देते रहे, अब उसी के खिलाफ नए हमले के सवाल पर उन्होंने नरम रुख दिखाया है। ट्रंप ने कहा कि अगर संभव हुआ तो वे ईरान को और तबाह नहीं करना चाहेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि परिस्थितियां ऐसी हुर्इं तो उन्हें मजबूरन कदम उठाना पड़ सकता है। उनके इस बयान को चुनावी नतीजों के बाद बदले राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से ईरान पर नए हमले की संभावना को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, ‘अगर संभव हुआ तो मैं बाकी देश को तबाह नहीं करना चाहूंगा।’ हालांकि, इसके बाद उन्होंने यह कहकर सस्पेंस बनाए रखा कि लोगों को जल्द ही सब पता चल जाएगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान अमेरिका की मंजूरी के बिना कुछ नहीं कर रहा है। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल वे ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं।
वेंस ने भी ट्रंप को दिखाया आईना, बोले- युद्ध ने हराया
ट्रंप के नरम पड़ते तेवरों के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह ईरान युद्ध है। वेंस ने लिखा, ‘हमारी हार की वजह युद्ध है।’ उन्होंने यहां तक सवाल उठाया कि क्या सीनेट पर अगले छह साल तक नियंत्रण गंवाना इस युद्ध की कीमत के रूप में जायज था? वेंस ने कहा कि लोग इस फैसले से सहमत हों या असहमत, लेकिन कम से कम सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए।
हार के बाद भी युद्ध को सही बता रहे ट्रंप
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप अब भी ईरान के खिलाफ युद्ध के फैसले को सही ठहरा रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने बार-बार दावा किया था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए युद्ध जरूरी था। चुनावी हार के बाद उन्होंने माना कि युद्ध ने नतीजों को प्रभावित किया, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें अपना फैसला सही लगता है और मौका मिला तो वे दोबारा ऐसा ही करेंगे।
दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा
मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। सीनेट में रिपब्लिकन प्रभाव वाले कई राज्यों में डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की, वहीं प्रतिनिधि सभा में भी उन्होंने कम से कम ३० सीटें अपने पाले में कर लीं। अब ट्रंप के घरेलू एजेंडे पर विपक्ष का दबाव बढ़ेगा और उनके प्रशासन के फैसलों की जांच का रास्ता भी खुलेगा। ऐसे में २०२८ के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के सामने राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
