-नाटो देशों में जाकर फट रहे हैं
-सामना संवाददाता / मुंबई
-नाटो देशों पर असर
यूक्रेन के लिए ड्रोन सबसे सस्ता और प्रभावी हथियार है। कुछ हजार रुपए में बने ये ड्रोन रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर हमला करते हैं।
लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड में कई बार ऐसे ड्रोन घुस आए हैं। लातविया में एक तेल भंडारण सुविधा पर ड्रोन गिरकर फट गया। एस्टोनिया में नाटो के एफ-१६ विमान को पहली बार ड्रोन मार गिराना पड़ा। लातविया की प्रधानमंत्री को ड्रोन घुसपैठ के मामले में इस्तीफा देना पड़ा। ये घटनाएं नाटो देशों की पूर्वी सीमा पर लगातार बढ़ रही हैं।
रूस ने यूक्रेन युद्ध में एक नया खतरनाक हथियार ढूंढ लिया है। अब वह यूक्रेन के ड्रोन को हवा में हाईजैक करके उन्हें नाटो देशों की तरफ मोड़ रहा है। यह कोई गोला-बारूद से नहीं, बल्कि जीपीएस को धोखा देकर किया जा रहा है। रूस जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर यक्रेनी ड्रोन को भ्रमित कर देता है, जिससे वे अपना रास्ता भटक जाते हैं और नाटो देशों की ओर जाकर फट रहे हैं।
हाल ही में लिथुआनिया की राजधानी विल्नियस में अचानक हवाई हमले का अलर्ट जारी हुआ। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बम-प्रूफ बंकर में छिपना पड़ा। हवाई उड़ानें रद्द कर दी गईं। सड़कें बंद हो गईं। हजारों लोग भूमिगत पार्विंâग में छिप गए। यह नाटो देशों में से किसी की राजधानी में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहला ऐसा बड़ा अलर्ट था। बाद में पता चला कि ऊपर उड़ रहे ड्रोन यूक्रेन के थे, जिन्हें रूस ने हाईजैक कर लिया था। पहले वह
ड्रोन के जीपीएस सिग्नल को तेज नॉइज से ब्लॉक कर देता है। इससे ड्रोन भटककर नया सिग्नल ढूंढने लगता है। उसी समय रूस अपना फेक मजबूत सिग्नल भेजता है। ड्रोन इस नकली सिग्नल को असली समझकर उस पर भरोसा कर लेता है।
