सूरज सिंह
डी-कंपनी में दाऊद इब्राहिम के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओहदा रखने वाला छोटा शकील हिंदुस्थान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत में भी एक कुख्यात नाम है। शकील ने अपनी आपराधिक गतिविधियों की शुरुआत १९८० के दशक के अंत में की। मुंबई में सक्रिय रहते हुए वह धीरे-धीरे दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जुड़ा और अंडरवर्ल्ड की अवैध कमाई, संपत्तियों और रैकेट संचालन का अहम हिस्सा बन गया।
हिंदुस्थान में शकील के खिलाफ हत्या, जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन), अंतरराष्ट्रीय अपराध, हवाला नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड गतिविधियों जैसे लगभग १०४ मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है और केंद्रीय एजेंसियां उसे आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की प्रक्रिया भी चला रही हैं। हालांकि, सार्वजनिक रिकॉर्ड में उसका पहला अपराध एक विशेष घटना के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन शुरुआती दौर में वह मुंबई में जबरन वसूली, मटका/जुआ रैकेट, हत्या व संपत्ति विवादों में धमकी और हिंसा जैसे मामलों में शामिल होता था। कुछ ही वर्षों में वह साधारण ठेकेदार-गुर्गों से आगे बढ़कर मुंबई अंडरवर्ल्ड की उच्च श्रेणी की गतिविधियों का हिस्सा बन गया।
डी-कंपनी में उभार
छोटा शकील दाऊद इब्राहिम का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना गया। वह १९८० के दशक के अंत में डी-कंपनी से जुड़ा और तेजी से संगठन की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया। डी-कंपनी के तहत उसकी जिम्मेदारियों में शामिल थे-मुंबई व विदेशों में अपराध नेटवर्क का संचालन, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, हवाला और अवैध धन संचरण, जबरन वसूली (रैकेट), विदेशी संपत्ति और पैसों का प्रबंधन। शकील को दाऊद का ‘ऑपरेशनल कमांडर’ भी कहा जाता था, जो कई महत्वपूर्ण पैâसले लेता था और अभिनेताओं, बिल्डरों, कारोबारियों और फिल्म निर्माताओं तक नेटवर्क संभालता था।
अब कहां छुपा है?
छोटा शकील वर्तमान में फरार है और उसकी वास्तविक लोकेशन सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। जांच एजेंसियों और खुफिया सूत्रों के अनुसार, वह लंबे समय तक पाकिस्तान के कराची स्थित क्लिफ्टन इलाके में दाऊद के साथ रहता था और वहीं से नेटवर्क चलाता था। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसने पाकिस्तान छोड़ दिया और दुबई, बैंकॉक या हांगकांग जैसे देशों में सुरक्षित ठिकानों पर जा पहुंचा। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि वह आज भी पाकिस्तान या मध्य पूर्व/दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी देश में नेटवर्क के संपर्क में रहते हुए छुपा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क
शकील और उसके नेटवर्क पर कई गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे, जिनमें प्रमुख हैं- अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी, हवाला के जरिए धन शोधन, जबरन वसूली और धमकी, हथियारों व नकदी का अवैध लेन-देन, टेरर फंडिंग, विदेशों में संपत्ति और निवेश का प्रबंधन। उसके नेटवर्क का संबंध कई देशों में पैâला हुआ था। उसके कुछ सहयोगियों- जैसे सलीम कुरैशी उर्फ ‘सलीम प्रâूट’ को हिंदुस्थान की केंद्रीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है, जिससे डी-कंपनी की कई परतें उजागर हुईं।
विदेशी संपत्तियों का खुलासा
अंडरवर्ल्ड की वैश्विक गतिविधियों में छोटा शकील की भूमिका तब और स्पष्ट हुई, जब उसके विदेशी पासपोर्ट और अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई। उसके पास दो पासपोर्ट मिले-एक बाथटना से और दूसरा मलावी से जारी। माना जाता है कि ये पासपोर्ट उसके अवैध कारोबार में सहायक थे। शकील पर संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, पाकिस्तान, मोरक्को, अल्जीरिया, सिएरा लियोन, ट्यूनीशिया, यूएई, केन्या, स्पेन और दक्षिण अप्रâीका जैसे देशों में अचल संपत्तियों के स्वामित्व के आरोप भी लगे।
फिल्म उद्योग में दखल
शकील ने अबू सलेम के साथ मिलकर बॉलीवुड में वित्त और फिल्म निर्माण के नियंत्रण में भी भूमिका निभाई। वह फिल्म के अधिकारों की खरीद, वित्त की मंजूरी, कलाकारों व निर्माताओं पर दबाव जैसी गतिविधियों में शामिल रहा। २००१ में उसने एक इंटरव्यू में कई हिंदी फिल्मों को फंडिंग देने का दावा भी किया।
हत्या, साजिश व प्रतिबंध
१९९७ में डोंगरी स्थित बॉम्बे बेकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता एस. एम. रेखा की हत्या में उसका नाम सामने आया। सितंबर २००० में उसने इंडोनेशिया में रहने वाले राजन पर हमलों की साजिश को मंजूरी दी। १५ मई २०१२ को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने छोटा शकील और डी-कंपनी के सहयोगी टाइगर मेमन पर प्रतिबंध लगा दिया, यह मानते हुए कि वह १९८० के दशक के अंत से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी में शामिल रहा है। छोटा शकील का सफर मुंबई के स्थानीय अंडरवर्ल्ड से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क तक पहुंचा। आज वह डी-कंपनी में दाऊद के बाद सबसे बड़ा पद रख चुका है। सौ से अधिक मामलों में वांछित है। रेड कॉर्नर नोटिस पर फरार है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी में है और अभी भी गिरफ्त से बाहर है। छोटा शकील की कहानी यह बताती है कि वैâसे भारतीय अंडरवर्ल्ड की जड़ें वैश्विक अपराध नेटवर्क में बदल सकती हैं और वैâसे इन्हें तोड़ना किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सबसे कठिन चुनौती बन जाती है।
