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अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : मुंबई-दुबई रूट पर डी-कंपनी का नेटवर्क बरकरार …गोल्ड की तस्करी का मुंबई ड्रापपॉइंट

मुंबई-दुबई रूट पर डी-कंपनी का नेटवर्क एक बार फिर से सक्रिय हो गया है, जिससे सोने की तस्करी में वृद्धि हुई है। इंटेलिजेंस एजेंसियों के अनुसार, डी-कंपनी का पुराना गोल्ड रूट फिर से एक्टिव हो गया है और मुंबई में इस काम को संभालने वाले दो नाम फिर से चर्चाओं में हैं फीरोज और इकबाल। ये दोनों दाऊद इब्राहिम के करीबी हैं और हवाला, सोना और करेंसी रूट को तकनीकी तरीके से अपडेट करते हैं।

जय सिंह
मुंबई कस्टम और इंटेलिजेंस एजेंसियों को मिली ताजा जानकारी ने एक बार फिर दाऊद इब्राहिम के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सोने की तस्करी के हाल के मामलों में जिस तरह से पैटर्न दोहराया जा रहा है, उससे साफ संकेत मिलता है कि डी-कंपनी का पुराना गोल्ड रूट फिर एक्टिव हो चुका है और मुंबई–दुबई रूट पर हलचल भी बढ़ गई है। पिछले दो महीनों में एयरपोर्ट, क्रू मेंबर्स और कुरियर ट्रैवलर्स से पकड़े गए कई गोल्ड कंसाइनमेंट्स में एक जैसी मॉडस ऑपरेंडी दिखाई दी जैसे सोना छोटे-छोटे क्लस्टर्स में लाना, फ्लाइट स्वैपिंग और क्रू-पैसेंजर कोलैब और मुंबई में खास हैंडलर्स को हैंडओवर करना शामिल है।
इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक यह वही रूट और स्टाइल है, जो ९० और २००० में इकबाल मिर्ची और फिरोज जैसे दाऊद के करीबी संभालते थे। सूत्रों का दावा है कि दुबई और कराची के बीच बैठा डी-कंपनी का ‘गोल्ड सेल’ अब भी सक्रिय है। मुंबई में इस काम को संभालने वाले दो नाम फिर चर्चाओं में हैं एक नाम है फिरोज का जो दाऊद गिरोह का पुराना फाइनेंशियल मैनेजर है और हवाला, सोना और करेंसी रूट को तकनीकी तरीके से अपडेट करता है।
माना जाता है कि हवाई मार्ग से आने वाले ‘साइलेंट कूरियर’ उसी की प्लानिंग होते हैं इकबाल ‘ड्रॉपमास्टर’ काजिसे मुंबई में रिसीविंग का विशेषज्ञ माना जाता था, यह लोग छोटे कूरियर्स को अलग-अलग पॉकेट्स में बंटवाने का काम करके शहर में ८–१२ माइक्रो-हैंडलर्स का नेटवर्क बनकर रखे हैं।
दोनों का सीधा लिंक दाऊद के यूएई–पाक स्ट्रीम से बताया जाता है, जहां से गोल्ड की फंडिंग और मूवमेंट तय होती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि पहले कारोबार इकबाल मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची ही संभालता था, जिसकी हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी परेशान है कि यह इकबाल कौन है? गोल्ड स्मग्लिंग के लिए डी-कंपनी अब कॉल नहीं करती सभी निर्देश एन्क्रिप्टेड चैट, वीपीएन और टाइमर-बेस्ड मैसेज के जरिए दिए जा रहे हैं। तस्करों को बताया जाता है कि किस फ्लाइट से आना है, किस सीट स्वैप में बैठना है, किस टर्मिनल के किस वॉशरूम में पैकेट रखना है। यह सब बिना किसी लाइव कॉल के तय होता है, जिससे ट्रैकिंग बेहद मुश्किल। यह इसलिए भी माना जा रहा है कि मुंबई में फिर गोल्ड रिकवरी बढ़ गई है।
एयरपोर्ट पर हाल ही में पकड़े गए मामलों में बेल्ट के अंदर छिपा सोना, वैâमरा बैटरी में कंप्रेस्ड गोल्ड, यात्रियों के जूतों की हील में चिपकाई गई शीटये। सभी तकनीकें डी-कंपनी की पुरानी स्टाइल से मिलती हैं, बस आधुनिक रूप से किया जा रहा है।

एजेंसियों में चिंता है कि क्या फिर पैâल रहा है नेटवर्क
सीनियर इंटेलिजेंस अधिकारियों का मानना है कि दाऊद गिरोह ने ड्रग्स से हटकर गोल्ड रूट फिर से एक्टिव किया है, क्योंकि सोना आसानी से वैâश में कन्वर्ट होता और हवाला चैनलों में कम रिस्क है। हिंदुस्थान में त्योहार/मार्वेâट डिमांड हमेशा बनी रहती है। इसी कारण मुंबई को फिर ‘पसंदीदा ड्रॉप पॉइंट’ बनाया गया है।

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