सूरज सिंह
१९९० का दशक मुंबई में अंडरवर्ल्ड के खौफ का दौर माना जाता था। उस समय दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और कई गैंगस्टरों का दबदबा था। लेकिन इसी दौर में कुछ ऐसे पुलिस अधिकारी भी थे, जिनका नाम सुनकर अपराधी कांप उठते थे। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और एंटी नारकोटिक्स सेल में तैनात कई अधिकारी अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। इन्हीं अधिकारियों में एक नाम आईपीएस अधिकारी राहुल सूर का भी था, जिनकी कहानी आज भी रहस्य और विवादों से घिरी हुई है।
महाराष्ट्र वैâडर के १९८१ बैच के आईपीएस अधिकारी राहुल सूर ने मुंबई क्राइम ब्रांच के अमली पदार्थ विरोधी विभाग यानी एंटी नारकोटिक्स सेल में उपायुक्त के रूप में काम किया था। उस दौर में ड्रग्स माफिया और अंतर्राष्ट्रीय तस्करों के खिलाफ उनकी कार्रवाई काफी चर्चित रही। बताया जाता है कि अपने प्रभाव और संपर्कों के दम पर उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों को साधते हुए संयुक्त राष्ट्र संगठन (यूएनओ) में प्रतिनियुक्ति हासिल कर ली।
१७ जुलाई १९९७ को राहुल सूर को अमेरिका स्थित संयुक्त राष्ट्र में नियुक्ति मिली। उस समय इसे महाराष्ट्र पुलिस के लिए गर्व की बात माना गया था। लेकिन विदेश जाने के बाद घटनाक्रम अचानक बदल गया। जहां अन्य अधिकारी अपना कार्यकाल पूरा कर भारत लौट आए, वहीं राहुल सूर कभी वापस नहीं लौटे। एक-दो साल नहीं, बल्कि पूरा तीन दशक बीत गया, लेकिन उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया।
केंद्र सरकार ने कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार सरकार ने उनकी सेवा समाप्त कर दी। इस घटना ने पुलिस महकमे में भी हलचल मचा दी थी। सूत्रों के अनुसार, राहुल सूर ने बाद में अमेरिकी नागरिकता भी स्वीकार कर ली। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के गलियारों में राहुल सूर की कहानी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। एक समय मुंबई पुलिस का चर्चित चेहरा रहे राहुल सूर का इस तरह अचानक गायब हो जाना आज भी कई सवाल खड़े करता है।
