मुख्यपृष्ठस्तंभअंडरवर्ल्ड सीक्रेट :  मुंबई में खालिस्तानी आतंक का साया...जब सिख उग्रवादियों के...

अंडरवर्ल्ड सीक्रेट :  मुंबई में खालिस्तानी आतंक का साया…जब सिख उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चे पर उतरी थी मुंबई पुलिस

सूरज सिंह

९० के दशक की शुरुआत में पंजाब में अलग खालिस्तान राष्ट्र की मांग को लेकर उग्रवाद चरम पर था। इसका असर केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी जड़ें देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक पैâलने लगी थीं। शहर में सिख उग्रवादियों की बढ़ती गतिविधियों ने मुंबई पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी। हालात को देखते हुए मुंबई पुलिस ने विशेष आतंकवाद विरोधी दस्ता गठित किया और उसकी कमान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ए. ए. खान को सौंपी गई। ए.ए.खान के नेतृत्व में गठित इस विशेष पथक में साहसी और निडर पुलिस अधिकारियों तथा जवानों को शामिल किया गया। उन्हें आधुनिक हथियारों से लैस किया गया था। इसके साथ ही मुंबई क्राइम ब्रांच का स्पेशल ऑपरेशन स्क्वॉड भी लगातार सतर्क था। उस समय फौजदार राजू जाधव अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते थे। लेकिन विक्रोली के टैगोर नगर इलाके में सिख उग्रवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में उन्हें शहादत देनी पड़ी। उनकी मौत ने पूरे पुलिस विभाग को झकझोर दिया था। इसके बाद ४ और ५ मार्च १९९२ को भांडुप के खिंडीपाड़ा इलाके में पुलिस और सिख उग्रवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में पुलिस शिपाई भास्कर सोंजे वीरगति को प्राप्त हुए। पुलिस निरीक्षक विनायक कदम और अनंत केंजले जैसे अधिकारियों ने बहादुरी से मोर्चा संभाला। इस ऑपरेशन में कुल पांच सिख उग्रवादी मारे गए। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस के इतिहास की बड़ी आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों में गिनी जाती है। ११ मई १९९२ की रात भांडुप पुलिस के लिए कभी न भूलने वाली रात बन गई। रात करीब १० बजे फौजदार अशोक एरंडे गश्त पर थे, तभी सूचना मिली कि एक एम्बेसडर कार में सिख उग्रवादी घूम रहे हैं। एरंडे ने बिना देर किए कार का पीछा शुरू किया। मुठभेड़ के दौरान उन्होंने कुछ आतंकियों को गोली मारकर घायल भी किया, लेकिन इसी बीच आतंकियों की एक गोली उनके शरीर में जा लगी। गंभीर रूप से घायल होने के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस मुठभेड़ में हवलदार गावड़े भी घायल हुए, लेकिन उन्हें तत्काल हिंदुजा अस्पताल पहुंचाने के कारण उनकी जान बच गई। इन लगातार अभियानों के बाद मुंबई पुलिस ने उग्रवादियों के नेटवर्क को तोड़ दिया। आतंकियों पर ऐसी सख्ती की गई कि उन्हें मुंबई छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि, इस बहादुर अभियान में मुंबई पुलिस ने अपने तीन जांबाज जवान खो दिए। उनकी शहादत आज भी मुंबई पुलिस के साहस और बलिदान की मिसाल मानी जाती है।

अन्य समाचार