– ६५,००० में खरीदा जा रहा ३,००० का कैमरा
– ९.९४ करोड़ का सीसीटीवी प्रोजेक्ट २९४ करोड़ में
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
पवित्र आस्था और श्रद्धा के प्रतीक सिंहस्थ कुंभ मेले की आड़ में इस बार अपवित्र खेल खेले जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। धार्मिक आयोजन के नाम पर ३०० करोड़ रुपयों की भारी लूट का खुलासा हुआ है। बताया गया है कि ३,००० कीमत का वैâमरा ६५,००० रुपए में खरीदा गया, जबकि ९.९४ करोड़ के सीसीटीवी प्रोजेक्ट के लिए २९४ करोड़ रुपए में मंजूर किया गया, यानी २० गुना तक दाम बढ़ाए गए।
यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर जनता के भरोसे से खिलवाड़ का प्रतीक बन गया है। पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में सिंहस्थ की पवित्रता पर अब प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ियों का साया गहराता दिख रहा है। नासिक के सिंहस्थ कुंभ मेला २०२७ के लिए प्रस्तावित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली पर अब घोटाले का साया मंडराने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुंभार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि ९.९४ करोड़ की पुरानी परियोजना को अब २९४ करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया गया है, यानी खर्च में कई गुना उछाल किया गया है, जबकि काम और उद्देश्य वही हैं।
कुंभार के मुताबिक, निविदा दस्तावेजों के अध्ययन से साफ है कि कई वस्तुओं की दरें बाजार मूल्य से २ से २० गुना तक बढ़ाई गई हैं। इसमें फिक्स्ड वैâमरों की कीमत बाजार में ३,००० से १२,५०० रुपए तक है, जबकि उनकी दर निविदा में ६५,००० प्रति यूनिट बताई गई है। इसी तरह ४ मेगापिक्सल पीटीजेड वैâमरा १.३५ लाख रुपए में खरीदा जा रहा है, जबकि इनका बाजार भाव २२,००० से ६२,००० रुपए के बीच है।
तीन गुना आकार में लौटा वर्ष २०१५ का घोटाला!
१० करोड़ प्रतिदिन का कुंभ ‘पुण्य’!
विजय कुंभार ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि वर्ष २०१५ में तत्कालीन और मौजूदा मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसी प्रकार के सीसीटीवी प्रोजेक्ट की जांच के आदेश दिए थे, परंतु रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई। उन्होंने कहा है कि तब कहा गया था कि वैâमरे अस्थायी रूप से लगाए गए हैं। आज ११ साल बाद भी स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, यानी यह जानबूझकर दोहराया गया भ्रष्टाचार है।
कुंभ मेला कुल ३० दिन का आयोजन होता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ३०० करोड़ रुपए है। इस तरह प्रति दिन १० करोड़ का खर्च है। कुंभार ने इसे सार्वजनिक धन का खुला दुरुपयोग बताया और कहा कि यह धार्मिक आयोजन नहीं, सरकारी खजाने पर डाका है।
खत में ये हैं मांगें
सीएम को भेजे गए खत में कुंभार ने मांग की है कि पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। मैट्रिक्स स्मार्ट टेक्नोलॉजीज प्रा लि. और ईवाय सलाहकार कंपनी की भूमिका की जांच हो। वर्ष २०१५ की जांच रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए और सभी सरकारी प्रोजेक्ट्स में बाजार दर की तुलना को अनिवार्य बनाया जाए।
जनता का गुस्सा फूटा, सोशल मीडिया पर बवंडर!
नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ २०२७ के सीसीटीवी घोटाले पर सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुंभार के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। ट्विटर (अब एक्स) पर आम नागरिकों से लेकर पूर्व जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता तक ने सरकार और मनपा की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। पवित्र कुंभ मेला अब स्वैâम-मेला बन गया क्या? इस सवाल ने नेटिजन्स के बीच नई बहस छेड़ दी है। कुछ ने इसे आस्था की आड़ में सरकारी लूट कहा। सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने एक्स पर लिखा कि इन लोगों को शर्म नहीं आती? क्रिकेट वर्ल्ड ३६५ नामक यूजर ने लिखा कि अगर एक वैâमरा एक लाख का भी हो तो २९४ करोड़ रुपयों में कम-से-कम २९,४०० वैâमरे लगने चाहिए। कुंभ खत्म होने के बाद ३,००० भी गिनकर दिखा दो, वहीं कई यूजर्स ने २०१५ में लगाए गए सीसीटीवी वैâमरों का भी हिसाब मांगा, यह कहते हुए कि शहर में ५० वैâमरे भी दिखाई नहीं देते, बाकी सारे गायब हो गए।
पूरा मंत्रिमंडल कुंभ में पाप धोने जाएगा
तो पहले पाप करना तो जरूरी है न?
एक अन्य यूजर सुशील ने व्यंग्य किया कि पूरा मंत्रिमंडल कुंभ में पाप धोने जाएगा तो पहले पाप करना तो जरूरी है न? अगर पाप नहीं किया तो धोएंगे क्या, घर की चादरें? पूर्व सांसद भूषण शिरोले ने सवाल उठाया कि कहां गए वे इंप्रâा और फिन-इन्फ्लुएंसर, जो रोज सरकार की वाहवाही करते हैं? हिंदू यात्रा में इतना बड़ा घोटाला हुआ और सब चुप हैं। महाराष्ट्र सैनिक नाम के एक अकाउंट से लिखा गया है कि अब कुंभ मेला आयुक्त को पकड़ना पड़ेगा, जबकि एक अन्य यूजर ने कहा कि २० गुना रकम देने के बाद भी ठेकेदार वैâमरे उठा ले जाएंगे।
