सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति का सीधा झटका अब गांव-गांव तक पहुंचा है। राज्य के २८८ विधायकों को पिछले कुछ महीनों से अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए एक रुपया भी नहीं मिला। नतीजतन सड़क, पानी, बिजली और मूलभूत सुविधाओं के काम ठप पड़ गए और विधायकों पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। विधायकों को निधि नहीं मिलने से सरकार पर भी जनता नाराजगी जता रही है। लोगों का कहना है कि सरकार के पास अपनी पीठ थपथपाने वाले करोड़ों के विज्ञापनों के लिए पैसे हैं, लेकिन जनता की प्यास बुझाने और सड़कें दुरुस्त करने के लिए पैसा नहीं? हर विधायक के लिए तय सालाना ५ करोड़ रुपए का विकास फंड २०२५-२६ में भी सिर्फ कागजों पर है।
कर्ज में डूबा महाराष्ट्र
– राज्य पर कर्ज- ९ लाख करोड़ से अधिक
– ठेकेदारों का बकाया- ९० हजार करोड़
जनता का पैसा इमेज मेकओवर पर, विकास कार्यों पर शून्य!
– पैसे देने के बजाय सरकार ने बनाई नई समिति
-अजीत पवार की अध्यक्षता में ६ सदस्यीय उप समिति और ई-समर्थ ऑनलाइन सिस्टम के नाम पर फाइलों का खेल शुरू।
– असल में यह पारदर्शिता नहीं, बल्कि जनता को बेवकूफ बनाने का नया जाल है।
