मुख्यपृष्ठनए समाचारअवैध निर्माणों को शह देने वाले प्रशासन पर कब चलेगा योगी का...

अवैध निर्माणों को शह देने वाले प्रशासन पर कब चलेगा योगी का बुलडोजर?

डॉ. मंगलेश्वर त्रिपाठी / गाजियाबाद

सूर्या की हत्या के 24 घंटे के अंदर पुलिस ने आरोपी का एनकाउंटर कर दिया और जिला प्रशासन ने डासना में सरकारी जमीन पर बने मदरसे पर बुलडोजर चला दिया। 300 पुलिस-पीएसी जवानों की फौज लेकर अपर पुलिस आयुक्त राजकरण नैय्यर और डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र तिवारी ने दो घंटे में निर्माण जमींदोज कर दिया।
कार्रवाई की रफ्तार देखकर लग रहा है कि सिस्टम में बिजली सी दौड़ गई है, पर यही तेजी दो साल पहले कहां थी जब यह “अवैध” निर्माण ईंट-दर-ईंट खड़ा हो रहा था?
प्रशासन की “कुंभकर्णी नींद” पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मदरसे का निर्माण दो वर्षों तक चला और लगभग 3 साल से मदरसा चल रहा था। दिन-दहाड़े ट्रक भरकर मटेरियल आता रहा, मजदूर काम करते रहे। राजस्व विभाग का लेखपाल, GDA का जेई, थाने का बीट सिपाही-किसी को भनक नहीं लगी? या सबकी आंखें “निजी स्वार्थ” के पट्टी से बंधी थीं? अगर आज यह जमीन सरकारी है, तो पिछले कई साल पहले भी सरकारी ही थी। जब निर्माण हो रहा था, तब नोटिस क्यों नहीं दिया गया? धारा 133, 151 की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन हादसे का इंतजार कर रहा था, ताकि कार्रवाई को “जनभावना” का नाम दिया जा सके?
सूर्या की हत्या निंदनीय है। आरोपी को सजा मिलनी ही चाहिए, पर न्याय का मतलब एनकाउंटर और उसके बाद चुनिंदा बुलडोजर नहीं होता। न्याय का मतलब है सिस्टम की नाकामी पर भी कार्रवाई।
आज जिस तेजी से मदरसा गिराया गया, क्या उसी तेजी से उन अधिकारियों की सूची बनेगी, जिन्होंने कई वर्षों तक इस अवैध निर्माण को संरक्षण दिया? तहसील से लेकर विकास प्राधिकरण तक, जिस-जिस की जिम्मेदारी थी, क्या उन पर मुकदमा होगा? या फिर एक बुलडोजर चलाकर फाइल बंद कर दी जाएगी?
“जीरो टॉलरेंस” का दोहरा चेहरा बेनकाब
डीसीपी ग्रामीण कह रहे हैं कि “जीरो टॉलरेंस नीति” है। सवाल यह है कि यह नीति अपराध होने के बाद ही क्यों जागती है? पहले क्यों नहीं? अगर जीरो टॉलरेंस है तो सरकारी जमीन पर हर अवैध कब्जा-मंदिर, मकान, दुकान, फार्महाउस-सब पर बुलडोजर कब चलेगा? या सिर्फ हत्याकांड के बाद एक समुदाय विशेष को निशाना बनाकर जनता का गुस्सा शांत किया जा रहा है?
असली कार्रवाई कब होगी?
प्रशासन कह रहा है “सर्वे कराएंगे, लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई होगी।” यह जुमला पुराना है। सूर्या को न्याय तभी मिलेगा जब हत्या के साथ-साथ सिस्टम की हत्या करने वालों को भी सजा मिले।
जब तक अवैध निर्माण होने देने वाले SDM, तहसीलदार, जेई, SO पर सस्पेंशन, एफआईआर नहीं होगी, तब तक यह बुलडोजर सिर्फ खबर बनेगा, नजीर नहीं। जनता पूछ रही है-बुलडोजर चलाने वाले अफसरों के दफ्तर में बैठे उन अफसरों पर बुलडोजर कब चलेगा, जिन्होंने दो साल तक कब्जा करवाया और निर्माण होने के कई वर्षों तक नजर अंदाज किया?

अन्य समाचार