रामदिनेश यादव / मुंबई
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इन दिनों एक पोस्टर को लेकर हलचल मची हुई है। मुंबई के हर कोने पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिखाई दे रहे हैं। देवाभाऊ नाम से इस होर्डिंग में देवाभाऊ अर्थात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छत्रपति शिवाजी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दिखाए गए। कई अखबारों में इसका विज्ञापन भी छपा। जहां गणपति बाप्पा को भी पुष्पांजलि अर्पित करते दिख रहे हैं। इन पोस्टर और बैनरों के माध्यम से फडणवीस की छवि को चमकाने का भरपूर प्रयास किया गया, पर इसमें विज्ञापनदाता का नाम कहीं भी जाहिर नहीं किया गया है। अब विपक्ष ने हमला करते हुए इस विज्ञापन के लिए बड़े पैमाने पर काले धन का उपयोग किए जाने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन दाता का नाम सामने नहीं आने से विपक्ष के आरोप सही साबित होते दिख रहे हैं। इधर इस होर्डिंग के लिए शिंदे गुट के एक मंत्री के नाम की चर्चा तेज हो गई है। ठाणे जिले के इस मंत्री की नजदीकियां पिछले कुछ दिनों से देवेंद्र फडणवीस से बढ़ी हैं।
यह मंत्री, उप मुख्यमंत्री शिंदे का विरोधी माना जाता है। अब फडणवीस को अपना आका मानते हुए इस मंत्री ने बड़े पैमाने पर लगभग ४५ से ५० करोड़ रुपए का विज्ञापन एक साथ जारी किया है, ताकि मराठा आंदोलन के बाद धूमिल हुई फडणवीस की छवि को देवाभाऊ के तौर पर एक बार फिर से चमकाया जा सके।
बता दें मुंबई में हजारों विशाल होर्डिंग में देवेंद्र फडणवीस के लगे पोस्टर को लेकर विपक्ष ने हमला बोला है, वहीं इस होर्डिंग को लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। होर्डिंग्स में भाजपा के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया है। किसी भी नेता का फोटो यहां तक की पार्टी का चिह्न भी नहीं इस्तेमाल किया गया है। विज्ञापन जारी करनेवाले का नाम तक कहीं जाहिर नहीं किया गया है। जाहिर है इस विज्ञापन को लेकर फडणवीस की छवि को बड़ा तो बनाया जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर यह विशाल पोस्टर के माध्यम से उनकी छवि को विशाल बनाने का कम किसके इशारे पर हो रहा है, इस बारे में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
