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चुनाव की जल्दबाजी क्यों? सवाल पर… चुनाव आयोग खामोश!

-फर्जी वोटर लिस्ट में सुधार के बाद चुनाव कराने का विपक्ष ने किया था आग्रह

-२४६ नगरपालिका और ४२ नगर पंचायत के चुनाव हुए घोषित

सामना संवाददाता / मुंबई

मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गई हैं। सत्ताधारी दल को छोड़कर सभी राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं, ऐसे में सवाल है कि चुनाव कराने की इतनी जल्दबाजी क्यों है? कल पत्रकारों ने जब यह सवाल पूछा तो इस पर राज्य चुनाव आयोग खामोश हो गया। उसने कोई जवाब नहीं दिया। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने इस प्रश्न का उत्तर देने से परहेज किया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और उनके इशारों पर निर्णय ले रहा है। जब पत्रकारों ने यह सवाल दिनेश वाघमारे से पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि यह आरोप गलत है। चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष है। हम किसी भी दबाव में काम नहीं कर रहे हैं।
बता दें कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों की कई शिकायतें आई हैं। इस बारे में कल चुनाव आयोग से पूछा गया कि कई दोहरे और तिहरे मतदाता हैं, जिनमें एक ही घर के ४०-४५ लोग वोट डालते हैं। फिर इतनी हड़बड़ी क्यों? पत्रकारों के इस सवाल पर राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि हमने दोहरे और तिहरे मतदाताओं के लिए पूरी तैयारी कर ली है। गौरतलब है कि राज्य की २४६ नगरपालिकाओं और ४२ नगर पंचायतों के चुनावों की तारीखें घोषित कर दी गई हैं। इसके अनुसार २ दिसंबर को मतदान होगा और ३ दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।
अधिकारी करेंगे संपर्क
चुनाव आयोग ने कहा कि जहां ऐसे मतदाता हैं, वहां हमारे अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे। वे अपनी पसंद का मतदान केंद्र बताएंगे और अगर उन्होंने इस अपील का जवाब नहीं दिया तो हम उनसे शपथ पत्र लेंगे और उसके बाद उन्हें मतदान करने की अनुमति देंगे। राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए बेहद सावधानी बरती है।
विकसित किया ‘टूल’
चुनाव आयोग ने डुप्लीकेट मतदाता के बारे में कहा कि हमने अपनी प्रणाली में एक विशेष टूल (उपकरण) विकसित किया है। इस टूल के जरिए हर नगर परिषद और नगर पंचायत के प्रत्येक वॉर्ड में दोहरे नामों का पता लगाया जाएगा।

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