-सीबीआई, पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का डर
-दिखाकर बुजुर्ग को १७ दिन तक बनाया बंधक
-साइबर ठगों ने उड़ा ली जीवनभर की कमाई
सुरेश गोलानी / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र में साइबर अपराधियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अब ठगों ने कानून और जांच एजेंसियों के नाम का ऐसा खौफ पैदा करना शुरू कर दिया है कि लोग बिना किसी सत्यापन के अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी उनके खातों में भेज रहे हैं। ताजा मामला भायंदर-पश्चिम का है, जहां ७९ वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से ६२.५० लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली गई। यह सिर्फ एक व्यक्ति से धोखाधड़ी नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता पर बड़ा सवाल है।
केंद्र सरकार के सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन से सेवानिवृत्त हुए पीड़ित ने भायंदर पुलिस को दिए अपने बयान के अनुसार, पहले तो खुद को बैंक का कर्मचारी बताकर एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हॉटसऐप कॉल किया और उनके क्रेडिट कार्ड खाते में १.०९ लाख रुपए बकाया होने का दावा किया। पहले से सकते में पीड़ित द्वारा ऐसे किसी कार्ड के उपयोग किए जाने के बारे में अज्ञानता जताने के बाद, उन्हें एक और झटका लगा जब दूसरा व्यक्ति लाइन पर आया और अपने आप को पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि अंधेरी पुलिस थाने में संदीप कुमार नामक आरोपी के खिलाफ मनी
लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है, जिसमें पीड़ित के दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है। दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पीड़ित को कई बैंक खातों के नंबर दिए और रकम ट्रांसफर करने की सलाह देते हुए चेतावनी दी कि इस बात का किसी से भी जिक्र न करें। पीड़ित को यह आश्वासन भी दिया गया कि उनके द्वारा जो भी रकम जमा होगी वो रिफंड की जाएगी।
