-नागपुर में ३ महीने में ३२ हत्या
-साल में अब तक ५७ की जान गई
सामना संवाददाता / मुंबई
नागपुर से आ रही खबर ने सबको हिला कर रख दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अपने गृह जिले में ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। चोरी, लूट, छेड़छाड़ के साथ-साथ हत्या के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। घटनाओं ने शहर की शांति भंग कर दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि मई से जुलाई तक सिर्फ ३ महीनों में नागपुर में ३२ लोगों की हत्या कर दी गई। साल की शुरुआत से अब तक ये आंकड़ा ५७ तक पहुंच चुका है। सबसे खौफनाक महीना रहा मई। इस महीने अकेले १५ लोगों की हत्या हुई। जून में ७ और जुलाई में अब तक १० हत्या दर्ज की जा चुकी हैं। अगर पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति और डरावनी लगती है। पिछले साल मई में ७, जून में ८ और जुलाई में ९ हत्याएं हुई थीं। यानी इस साल सिर्फ मई में ही हत्याएं दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई हैं। चिंता की बात ये है कि नए पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटील ने जैसे ही चार्ज संभाला, पहले ही महीने में हत्याओं का आंकड़ा १० के पार पहुंच गया। इसका मतलब साफ है कि पुलिस की सख्ती के बावजूद अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में दिनदहाड़े लूट और रात में चोरी की घटनाएं आम हो गई हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामले भी बढ़े हैं। पुलिस सिर्फ एफआईआर दर्ज कर रही है, लेकिन अपराधियों में कानून का डर खत्म हो गया है। क्राइम एक्सपर्ट्स का मानना है कि पॉलिटिकल संरक्षण और पुलिस पर दबाव की वजह से कार्रवाई में देरी हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग ‘देवा भाऊ कुछ तो कीजिए’ लिखकर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के अपने शहर में अगर कानून व्यवस्था के ये हाल हैं, तो पूरे राज्य की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजमी है। नागपुर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब अपराध पर लगाम लगाना है।
नागपुर में बढ़ता अपराध का ग्राफ!
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह जिले में बढ़ती हत्याओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई से जुलाई तक ३२ हत्याएं और सालभर में ५७ मौतें दर्ज हुर्इं। चोरी, लूट और छेड़छाड़ की घटनाओं से नागरिकों में डर का माहौल है।
