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सड़क पर एक लाइन से खुले हैं २० मैनहोल…सोने में मस्त हैं मनपा अधिकारी!

-पवई, तुंगा गांव के लोगों में भय

द्रुप्ति झा / मुंबई

बारिश से पहले शहर के सभी गटरों की मरम्मत की जाती है। इसके लिए मनपा करोड़ों का बजट निकालती है, लेकिन हर साल हालात ऐसे होते हैं कि गटरों के ऊपर ढक्कन ही नहीं दिखते हैं। बारिश से पहले ही ढक्कन या तो टूट जाते हैं या फिर गायब ही हो जाते हैं। इससे बारिश के दौरान लोगों की जान को खतरा बना रहता है। पवई के तुंगा गांव में एक लाइन से तकरीबन २० मैनहोल खुले पड़े हुए हैं, जहां पर कई झोपड़पट्टी भी हैं और लोगों को हमेशा डर बना रहता है कि उनके बच्चे कहीं खेलते-खेलते गिर न जाएं। साथ ही उनमें कचरे भी भरे हैं, जिस वजह से पानी की निकासी नहीं हो पाती और पानी सड़क पर भर जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि मैनहोल के ढक्कन ही नहीं हैं तो कहीं टूटे, तो कहीं गायब ही हैं।
स्थानीयों के मुताबिक, मनपा की आंखें तब नहीं खुलीं, जब २०२४ में बारिश के मौसम में विमल गायकवाड़ नामक महिला काम से घर लौट रही थी, इसी दौरान सड़क पार करते समय डिवाइडर के मध्य में बने खुले नाले में गिर गई और कई मीटर तक बह गई थी। इसी तरह ७-८ साल पहले एक बड़े डॉक्टर की मौत गटर में गिरने की वजह से हो गई थी। यही वजह है कि अभी तक भी मनपा सो रही है। खुले पड़े मैनहोल से लोगों को अब हादसों का डर सता रहा है। मनपा अधिकारी शहर में खुले पड़े मैनहोल को लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं। इसको लेकर स्थानीय लोग निगम में बार-बार इनको बंद करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन मनपा अधिकारियों का इस पर जरा भी ध्यान नहीं है। खुले मैनहोल में गिरने से लोग बार-बार हादसों का शिकार हो रहे हैं। वहां पर रहने वाले लोगों ने कहा कि हमें डर लगता है हमारे बच्चे छोटे-छोटे हैं कभी खेलते-खेलते गिर गए तो बड़ा हादसा हो सकता है। हमारी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शायद मनपा किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। कोई गंभीर हादसा होगा, तभी जाकर वो इस मैनहोल को ढक्कन लगाएंगे। कुछ के ढक्कन टूटे हैं तो कुछ के हैं ही नहीं।

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