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संपादकीय : कैसा गुस्सा?..सब ठंडा ही ठंडा है!

प्रधानमंत्री मोदी के भक्तों की मंडली इन दिनों जश्न में डूबी हुई है। यह जश्न उनके प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल के १२ साल पूरे होने का है। इस उत्सव के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी शुभकामनाएं भेजी हैं। भक्तों की मंडली बड़े चाव से बता रही है कि ट्रंप ने मोदी को अपना मित्र और एक समझदार नेता कहा है। हो सकता है, यह सच भी हो। एक कहावत है, ‘ठूंठ पेड़ पर उल्लू का बसेरा’ या ‘जैसे मियां काठ के, वैसे मियां साठे के’। भले ही यह एक लोकोक्ति हो, लेकिन ट्रंप-मोदी के रिश्तों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। इधर मोदी को अपना ‘मित्र’ बताकर उनकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे और उधर उन शुभकामनाओं की स्याही सूखने से पहले ही ओमान के समंदर में भारतीय जहाजों पर अमेरिकी सेना ने हमला कर दिया। भला यह वैâसी मित्रता है? अब तक तीन भारतीय जहाजों पर अमेरिका हमले कर चुका है, जिनमें तीन भारतीय नाविकों (खलासी) की मौत हो गई। ये हमले तब हुए जब भारतीय जहाज ईरान से तेल का टैंकर लेकर निकले थे। अगर ओमान की नौसेना ने भारतीय नाविकों को न बचाया होता, तो सौ से ज्यादा नाविक इस अमेरिकी हमले में मारे जाते। इस हमले पर मोदी के ‘नए भारत’ की क्या प्रतिक्रिया रही? तो कहा जा रहा है कि भारत ने अमेरिका की ‘निंदा’ की है! तीन मासूम भारतीयों की जान चली गई, तेल से भरे टैंकर उड़ा दिए गए और हमने सिर्फ निंदा का कागज थमाकर अपना कर्तव्य पूरा मान लिया। अमेरिका ने समुद्री नाकेबंदी कर रखी थी और भारतीय जहाज इसी नाकेबंदी को पार कर आगे बढ़ रहे थे। जहाजों पर शान से भारत का तिरंगा लहरा रहा था, फिर भी अमेरिकी सेना ने उन
जहाजों पर हमला
कर दिया। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि अमेरिकी सेना को इस बात का कोई इल्म नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ‘विश्वगुरु’ हैं और न ही अमेरिकी सेना की गिनती में यह बात आती है कि राष्ट्रपति ट्रंप मोदी या भारत को अपना मित्र मानते हैं। भारतीय जहाजों पर बिना किसी वजह के हमला करके अमेरिका ने युद्ध अपराध किया है। जो तीन भारतीय नाविक मारे गए, उनमें से एक आदित्य शर्मा महज २३ साल का था। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। लेकिन इन तीन नाविकों की मौत का रत्ती भर भी गम न तो मोदी सरकार को है और न ही भारतीय जनता पार्टी को। वे तो बस अपने ‘१२ साल’ पूरे होने के जश्न में सराबोर हैं और इस बात से फूले नहीं समा रहे कि उत्सव को राष्ट्रपति ट्रंप का आशीर्वाद मिल गया है। भारतीय नागरिकों की रक्षा करने में मोदी सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। ट्रंप के साथ मोदी के क्या व्यक्तिगत संबंध हैं, इससे देश को कोई लेना-देना नहीं है। भारतीयों की जान अमेरिकी हमलों में जा रही है, यह बेहद गंभीर मुद्दा है। इस गंभीर विषय पर मोदी को सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से बात करनी चाहिए थी। भारतीय नाविक कोई समंदर के कॉकरोच नहीं हैं कि कोई भी आए और उन्हें कुचल कर चला जाए। अगर आपके व्यक्तिगत संबंध भारतीयों की जान बचाने के काम ही नहीं आ सकते, तो देश उन संबंधों की आरती क्यों उतारे? अगर आप सिर्फ दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बड़े अफसरों को बुलाकर कागजी निंदा की दहाड़ मारेंगे तो भला उससे क्या हासिल होने वाला है? खुद का भारी नुकसान झेलने के बाद भी ईरान जैसा देश
अमेरिका के ‘ईंट’
का जवाब ‘पत्थर’ से तुरंत दे रहा है और डंके की चोट पर जवाबी हमले कर रहा है। दूसरी तरफ, खुद को राष्ट्रपति ट्रंप का ‘मित्र’ और ‘विश्वगुरु’ बताने वाले मोदी तीन-तीन भारतीय नाविकों की बलि लेने वाले अमेरिका के खिलाफ ‘उफ’ तक नहीं कर रहे हैं। यही मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब केरल के समुद्र तट के पास दो केरल के मछुआरों की हत्या पर उन्होंने तत्कालीन यूपीए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। वे अपनी जनसभाओं में गरजते हुए पूछते थे कि ‘इन दो मछुआरों पर गोलियां बरसाने वाले इटली के नौसैनिक भारत की किस जेल में बंद हैं, जनता यह जानना चाहती है’ तो फिर अब मोदी जी, ओमान के समंदर में तीन भारतीय नाविकों की जान लेने वाले अमेरिकी नौसैनिकों को आपकी सरकार ने किस जेल में डाला है? भारत की जनता आज यह जानना चाहती है। लेकिन अफसोस, उस वक्त नसें तानकर सवाल पूछनेवाले आज जवाब देने के नाम पर दुम दबाकर भाग रहे हैं। भारत का एक-एक नागरिक सरकार के लिए अनमोल होना चाहिए, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हो। उनकी रक्षा की जिम्मेदारी मोदी सरकार की ही है। अपने नागरिकों की मौत पर दूसरे देशों के लोग किस तरह तड़प उठते हैं और गुस्से में सड़कों पर उतर आते हैं, यह भारतीयों को पश्चिमी देशों से सीखना चाहिए। खबरों में तो छपा कि भारतीय नाविकों की मौत से लोगों में भारी गुस्सा है, लेकिन यह गुस्सा आखिर दिख कहां रहा है? पिछले १२ सालों में मोदी और उनकी मंडली ने भारतीयों के भीतर के गुस्से को ठंडी राख में तब्दील कर दिया है। इसीलिए अब अमेरिकी हमले में तीन नाविक मारे जाएं या पहलगाम में आतंकवादी २६ हिंदू पर्यटकों को भून दें… देश में सब कुछ एकदम ठंडा-ठंडा ही रहता है!

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