-अनुमति के लिए मनपा ने हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा ने दहिसर और भायंदर के बीच कोस्टल रोड के विस्तार के लिए चार हजार से अधिक मैंग्रोब्ज काटने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मनपा ने काटे जानेवाले मैंग्रोब्ज वनों के मुआवजे के रूप में वृक्षारोपण की संख्या को तीन गुना अधिक करने का भी दावा किया, लेकिन न्यायालय ने मनपा को इस संदर्भ में एक शपथपत्र देने का आदेश दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि हमें मौखिक गारंटी नहीं चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ऐसा वृक्षारोपण वास्तव में जारी रहेगा।
जनहित से जुड़ी परियोजनाओं में मैंग्रोब्ज काटे जाते हैं और मुआवजे के रूप में सरकारी एजेंसियां न्यायालय से और अधिक वृक्षारोपण करने का वादा करती हैं, लेकिन हकीकत में इस वादे का पालन नहीं किया जाता है। मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाते हैं और बिना रखरखाव के उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, ऐसी टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने मनपा को उपरोक्त आदेश देते हुए की। न्यायालय ने ऐसी परियोजनाओं में वृक्षारोपण सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। इसी तरह, अदालत ने मनपा को पूरे प्रोजेक्ट की जानकारी देने का भी आदेश दिया, यानी हलफनामे के जरिए स्पष्ट करने को कहा कि टेंडर प्रक्रिया निकलने के बाद प्रोजेक्ट पूरा होने में कितना समय लगेगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि मुआवजे के तौर पर लगाए गए १.३७ लाख पेड़ों का पुनर्वनीकरण सुनिश्चित करने के लिए पेड़ों के रखरखाव की जिम्मेदारी मनपा को सौंपी जानी चाहिए।
वनीकरण गारंटी का मांगा शपथपत्र
अदालत ने इस ओर भी मनपा का ध्यान आकर्षित किया कि मुआवजे के तौर पर लगाए गए अधिकतर पेड़ रखरखाव के बिना सूख रहे हैं। अदालत ने मनपा को वनीकरण गारंटी के साथ परियोजना की जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही, महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) को मनपा की याचिका पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
