– मेयर के वॉर्ड के नालों में कचरे के अंबार पर विपक्ष का वार
-भाजपा का ‘मेरा शहर, मेरा अभिमान’ केवल बना एक नारा
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर महानगरपालिका द्वारा मानसून पूर्व शहर के नालों की सफाई के लिए दिए जाने वाले करोड़ों रुपए के ठेकों में लगातार भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ताजे उदाहरण में तो ‘चिराग तले अंधेरा’ वाला मुहावरा भारतीय जनता पार्टी शासित मनपा प्रशासन पर बिल्कुल सटीक साबित होता दिख रहा है। अन्य इलाकों की तरह मनपा में भाजपा की मेयर (प्रथम नागरिक) डिंपल मेहता के प्रभाग क्रमांक १२ में स्थित नाले में भी कूड़े-कचरे, गाद (सिल्ट), मलबे और जल निकासी में बाधा डालने वाले अवरोधों से भरे पड़े हैं। भारी बरसात के दौरान जल-भराव की आशंका के अलावा, इस इलाके के नालों और गटरों में जमा इस कचरे के कारण भयंकर दुर्गंध और मच्छरों के पनपने से डेंगू, वायरल संक्रमण और मलेरिया जैसी जानलेवा मौसमी बीमारियों का खतरा भी निरंतर बना हुआ है। नाला सफाई में भ्रष्टाचार की पोलखोल करने वाली तस्वीरों के साथ युवक कांग्रेस के प्रवक्ता रवि खरात ने कहा, ‘शहर की सफाई को लेकर प्रशासन और सत्ताधारी बड़े-बड़े एलान कर रहे हैं, लेकिन अगर मेयर के वॉर्ड में ही यह हालत है, तो बाकी इलाकों के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है, भाजपा का ‘मेरा शहर, मेरा अभिमान’ केवल एक नारा बन कर रह गया है।’ मनपा प्रशासन के दावों के अनुसार, शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई १०० प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई बड़े नाले अब भी कचरा और गाद से भरे पड़े में है। कहीं सफाई का कार्य अधूरा है तो कहीं निकाली गई गाद को नालों के किनारे ही जमा कर दिया गया है। ज्ञात हो कि मनपा प्रशासन ने निजी कंपनियों को नाला सफाई और भारी बरसात के दौरान निचले और जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए सक्शन पंप लगाने और उनके संचालन का ठेका दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए ४ करोड़ रुपए से अधिक मूल्य वाले इन ठेकों से भ्रष्टाचार की बू आना स्वाभाविक है।
