– मुनगंटीवार ने अपनी ही सरकार को घेरा
-मंत्रियों पर विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाकर मचाई हलचल
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने अपनी ही पार्टी की सरकार और मंत्रियों को कटघरे में खड़ा कर दिया। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न देने के प्रस्ताव को लेकर उन्होंने विधानसभा में तीखे तेवर दिखाए और मंत्रियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाते हुए अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग कर डाली।
मुनगंटीवार ने कहा कि ५ मार्च २०२६ को उन्होंने विधानसभा में सावरकर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने संबंधी गैर-सरकारी प्रस्ताव रखा था। उस समय सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने सदन में कहा कि वह स्वयं केंद्र में जाकर संबंधित लोगों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उन्हें पता चला कि प्रस्ताव वहां तक पहुंचा ही नहीं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसमें कोई आर्थिक मांग नहीं है, केवल राष्ट्रभक्ति की भावना का सम्मान करने का विषय है। महाराष्ट्र की जनता के मन में राष्ट्रभक्ति की ज्योति प्रज्वलित करने वाले सावरकर के सम्मान का प्रस्ताव भेजना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुनगंटीवार ने भाजपा के २०१९ के चुनावी घोषणापत्र की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उसमें महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और स्वातंत्र्यवीर सावरकर के संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव लाने का वादा किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने गैर-सरकारी प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन यदि ५ मार्च से २३ जून तक फाइलें ही आगे नहीं बढ़ेंगी, तो यह सदन और जनादेश दोनों का अपमान है।
