सरकार, पीडब्ल्यूडी और एस आर डी सी पर गंभीर आरोप;
राजन पारकर /मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक नाना पटोले ने एक बार फिर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। मुंबई में पांच टोल नाकों पर टोल माफी के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार कंपनी को अनुचित लाभ दिलाने का आरोप लगाते हुए पटोले ने मुख्य सचिव, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के अपर मुख्य सचिव और एमएसआरडीसी के प्रबंध संचालक के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की नोटिस विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी है।
पटोले के मुताबिक, एम ई पी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को शासन ने नियमों के विपरीत अनुचित रूप से अवधि बढ़ाकर, कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को करीब ₹3000 करोड़ का नुकसान पहुँचाया है।
उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर 2024 को कैबिनेट बैठक में हल्के वाहनों, स्कूल बसों और एसटी बसों को टोल से छूट दी गई थी, और इसके एवज में ठेकेदार ने ₹910.92 करोड़ की भरपाई की मांग की। मगर इतनी बड़ी राशि किस आधार पर तय की गई, इसका कोई ठोस डेटा न तो कंपनी ने दिया और न ही शासन ने मांग की, जिससे यह साबित होता है कि यह निर्णय केवल ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के इरादे से लिया गया।
नाना पटोले ने ये भी कहा कि करार 19 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, और उसके बाद बचे हुए समय के लिए एम एस आर डी सी खुद टोल वसूल सकता था। फिर भी न तो शासन ने वैसा कोई प्रस्ताव माँगा और न ही महामंडल ने स्वतः तशी कोई भूमिका मांडली। इससे शासन और महामंडल की भूमिका संदिग्ध और ठेकेदार को लाभ देने वाली साजिश प्रतीत होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बांधकाम विभाग को बार-बार पत्र भेजने के बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई, और ना ही उन्हें इसकी कोई जानकारी दी गई। इससे स्पष्ट होता है कि जानबूझकर जनप्रतिनिधियों को गुमराह किया गया और विधानमंडल जैसे सर्वोच्च संस्थान का अपमान हुआ है।
इसलिए उन्होंने महाराष्ट्र विधानमंडल नियम 271 के अंतर्गत विशेषाधिकार समिति को इस मामले में तात्कालिक और कठोर कार्रवाई करने की माँग की है।
