राधेश्याम सिंह | पालघर
पालघर जिले में बाल श्रम की कुप्रथा को खत्म करने की दिशा में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. इंदु राणी जाखड की अध्यक्षता में आयोजित जिलास्तरीय अंमलबजावणी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए।
डॉ. जाखड ने कहा कि, “बाल श्रम केवल कानून से नहीं मिटाया जा सकता, इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक और सक्रिय होना होगा।” उन्होंने शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिकों से अपील की कि वे बाल श्रम के खिलाफ जनजागरण करें और जरूरत पड़ने पर निजी संस्थानों पर छापेमारी करने से भी पीछे न हटें।
बैठक में निवासी उपजिल्हाधिकारी सुभाष भागडे, कामगार उप आयुक्त विजय चौधरी सहित अन्य अधिकारी और समिति सदस्य उपस्थित थे। इस दौरान बाल कामगार कृती दल, वेठबिगार दक्षता समिति, प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, लघु व्यापारी राष्ट्रीय पेंशन योजना, ई-श्रम पोर्टल और असंगठित श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर भी समीक्षा की गई।
डॉ. जाखड ने यह भी निर्देश दिया कि जिले में अगर कहीं वेठबिगार (बंधुआ मजदूर) परिवार पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत आर्थिक सहायता और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाए। इसके साथ ही, जिले के असंगठित क्षेत्र के अधिक से अधिक श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
अंत में जिल्हाधिकारी ने दोहराया कि, “बाल श्रम मुक्त पालघर का सपना तभी साकार होगा जब शिक्षक, पालक, प्रशासन, सामाजिक संगठन और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए और मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए।”
यह प्रयास न केवल पालघर जिले के बच्चों को उनका बचपन लौटाने की दिशा में एक मजबूत पहल है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी बन सकता है।
