पत्रकार की चेतावनी के बाद भी नहीं दुरुस्त किया गया था पुल
सामना संवाददाता / वडोदरा
नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद गुजरात को देश का सबसे उन्नत राज्य बनाने और दिखाने के लिए वाइब्रेंट गुजरात जैसे आयोजनों पर पानी की तरह पैसा बहाया गया था। गुजरात मॉडल को देश का नंबर वन विकास का मॉडल प्रचारित किया गया। मगर देखा जाए तो अब इस गुजरात मॉडल की रोज धज्जियां उड़ रही हैं। वहां से अक्सर भ्रष्टाचार, अपराध और हादसों की खबरें आती रहती हैं। पिछले कुछ वर्षों में गुजरात में कई पुल ध्वस्त हुए हैं, जिनमें कई लोगों की मौतें हुई हैं। कल महिसागर नदी का पुल ढह गया, जिसमें ११ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। अब लोगों का कहना है कि एक ओर लोगों की मौत हो रही है और दूसरी तरफ प्रशासन नीरो की तर्ज पर बांसुरी बजा रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि एक पत्रकार की चेतावनी के बाद भी पुल को दुरुस्त नहीं किया गया।
हालिया वर्षों के हादसे
हालिया वर्षों में गुजरात में कई पुल ढहने के हादसे हुए हैं। अमदाबाद में बना हाटकेश्वर पुल ५ साल में ही टूट गया। वर्ष २०२१ में मुमतापुरा पुल का एक हिस्सा ढह गया। कोइबा को ओल्ड कोइबा से जोड़ने वाला एक पुल अगस्त, २०२४ में निर्माण के ठीक एक साल बाद ढह गया। अक्टूबर, २०२२ में माछू नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज ढह गया, जिसमें १४१ लोगों की मौत हो गई। मरम्मत के बाद यह पुल चार दिन पहले ही फिर से खुला था। सूरत का मेट्रो फ्लाईओवर उद्घाटन से पहले ही टूट गया। मेहसाणा-विसनगर रिंग रोड को जोड़ने वाला ब्रिज का एक हिस्सा गत वर्ष ढह गया।
मरम्मत के एक साल बाद ही पुल ने तोड़ा दम!
गुजरात के वडोदरा जिले में कल बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। वडोदरा और आणंद को जोड़ने वाला गंभीरा पुल ढह गया। इस हादसे में कम से कम ११ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है। पुल के ढहते ही पांच वाहन सीधे नदी में जा गिरे, जिनमें एक ट्रक और एक पिकअप वाहन खबर लिखे जाने तक नदी में फंसे हुए थे।
यह हादसा पादरा क्षेत्र में हुआ, जहां महिसागर नदी पर गंभीरा पुल ४३ साल पहले बना था। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। घटना के बाद रेस्क्यू टीम नाव की मदद से घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नदी में पानी कम होने और कीचड़ के जमा होने की वजह से उन्हें मौके तक पहुंचने में काफी मुश्किलें हुर्इं। पानी में गिरे वाहनों को निकालने में अधिकारियों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी।
तो हादसा नहीं होता
गुजरात के एक स्थानीय गुजराती चैनल के पत्रकार ने तीन पहले पुल पर जाकर वहां व्रैâक होने की तस्वीरें दिखाई थीं। उसने पुल को खतरनाक बताया था, पर इसके बावजूद प्रशासन और सरकार ने इसकी कोई सुध नहीं ली और पुल को दुरुस्त नहीं किया। अगर उक्त पत्रकार की बातों को गंभीरता से लिया गया होता तो आज ये हादसा नहीं होता और बेकसूर लोगों की जानें नहीं जातीं।
कीचड़ से निकाले वाहन
मौके पर मौजूद पुलिस टीम को भी कीचड़ से वाहनों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पानी में जा गिरे ट्रक को रस्सी से बांधकर निकालने की कोशिश की गई। इसके लिए वहां क्रेन भी लाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना सुबह ८.३० बजे के आसपास की है।
