सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लगता है पीएम मोदी की राजनीतिक विदाई का संकेत मिलने लगा है। हालांकि, इस मामले में मोदी ने कुछ नहीं कहा है पर उनके दाहिने हाथ मोटाभाई के नाम से मशहूर गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान को लेकर लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। असल में मोटा भाई रिटायरमेंट के मूड में नजर आने लगे हैं। चर्चा है कि अमित शाह के बिना मोदी शायद काम करने में असहज महसूस करेंगे इसलिए उनकी विदाई की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दरअसल, कल अमित शाह ने अपना रिटायरमेंट प्लान बताया है। उन्होंने ‘सहकार संवाद’ कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैंने निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं अपना शेष जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन के लिए समर्पित करूंगा। उन्होंने गुजरात, राजस्थान के सहकारी कार्यकर्ताओं और महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही।
रिटायर होकर वैज्ञानिक
बनेंगे अमित शाह!
जैविक खेती में करेंगे प्रयोग
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने रिटायरमेंट का प्लान बना लिया है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, ‘मैंने निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं शेष जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन में समर्पित करूंगा। प्राकृतिक खेती एक वैज्ञानिक प्रयोग है, जो न केवल स्वास्थ्य समस्याओं को कम करती है, बल्कि कृषि उत्पादकता भी बढ़ाती है।
अमित शाह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों से उगाए गए गेहूं से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जबकि प्राकृतिक खेती शरीर को रोगमुक्त रखने में मदद करती है। अमित शाह ने इस दौरान सहकारी महिला कार्यकर्ताओं से संवाद किया और उनके सवालों के भी जवाब भी दिए। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने देश में सहकारी क्रांति का जिक्र किया। उन्होंने गुजरात बनासकांठा का उदाहरण देते हुए कहा, ‘जब मैं पैदा हुआ था, तब बनासकांठा में सप्ताह में केवल एक बार नहाने के लिए पानी मिलता था।
बनासकांठा और कच्छ गुजरात के सबसे अधिक पानी की कमी वाले जिले थे। आज, वहां एक परिवार केवल दूध उत्पादन से सालाना १ करोड़ रुपए कमा रहा है। यह एक बहुत बड़ा बदलाव है।’ गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय पीएम मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करते हुए किसानों को सशक्त बना रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।
