सामना संवाददाता / मुंबई
दादर स्थित बहुचर्चित कबूतरखाने को मनपा ने पूरी तरह से ढंक दिया है। चारों तरफ से बांस का सहारा लेकर और ऊपर से त्रिपाल डालकर पूरी तरह ढंक दिया गया है। मुंबई हाई कोर्ट के आदेश के बाद मनपा ने शहर के कबूतरखानों पर कार्रवाई शुरू की थी। कबूतरखाने के मुद्दे को लेकर अब जैन समाज आक्रोशित हो गया है और इसके विरोध में रविवार मुंबई में जैन समाज की ओर से शांतिदूत यात्रा निकालकर विरोध दर्ज किया गया।
रविवार को दादर के ऐतिहासिक कबूतरखाने पर जब स्थानीय निवासी और पक्षीप्रेमी एकत्र हुए, तो उन्होंने पाया कि लगभग सौ साल पुराना यह कबूतरों को दाना डालने का स्थान बंद कर दिया गया है और इसे त्रिपाल से ढंक दिया गया है। ३० जुलाई को मुंबई हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, जिन्हें सख्ती से लागू करने का प्रयास किया जा रहा है और अदालत द्वारा इन निर्देशों पर रोक देने से इनकार किए जाने के बावजूद, प्रतिबंधित स्थलों पर कबूतरों को दाना डालना अनवरत रूप से जारी है।
बता दें कि मुंबई में कम से कम ५१ कबूतरखाने हैं, जिनमें दादर का कबूतरखाना सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। १९३३ में इसे बनाया गया था। कबूतरखाना ट्रस्ट के ट्रस्टी और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। मनपा ने बताया कि उन्होंने इस हेरिटेज स्थान को बंद कर दिया है, क्योंकि कबूतरों को दाना डालने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।
दादर कबूतरखाने पर लगे एक बोर्ड में लिखा है, `सभी नागरिकों को सूचित किया जाता है कि इस स्थल पर पक्षियों और जानवरों को दाना डालना सख्त रूप से प्रतिबंधित है। ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों को दाना डालने से फंगल इन्फेक्शन और सांस की बीमारियां हो सकती हैं।’ इस नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि जो व्यक्ति कबूतरों को दाना डालते पाए जाएंगे, उन पर ५०० रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
हाई कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
याचिका की सुनवाई करते हुए मुंबई हाइ कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मुद्दा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। पक्षियों की बीट से होने वाली गंदगी और राहगीरों को रूमाल लेकर चलने की मजबूरी जैसी समस्याओं को देखते हुए अदालत ने यह निर्देश दिया कि नियम तोड़ने वालों की पहचान फोटोग्राफ्स के जरिए कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इन आदेशों के आलोक में मनपा ने शनिवार शाम को दादर कबूतरखाने पर बांस के खंभे लगाकर और प्लास्टिक शीट बिछाकर प्रतिबंध को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की। ३ जुलाई को राज्य सरकार ने बीएमसी को निर्देश दिए थे कि वह तुरंत सभी कबूतरखाने बंद करे। इसके बाद बीएमसी ने पक्षियों को अवैध रूप से दाना डालने वालों पर जुर्माना लगाकर सख्त कार्रवाई शुरू की थी।
