मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिराखी पूर्णिमा के अवसर पर परशुराम कुण्ड पर ब्रह्मोत्सव

राखी पूर्णिमा के अवसर पर परशुराम कुण्ड पर ब्रह्मोत्सव

रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई

श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में तुंगारेश्वर पर्वत के परशुराम कुण्ड पर बालयोगी सदानंद महाराज का जन्म दिन उनके भक्त ब्रह्मोत्सव दिवस के रूप में मनाने जा रहें हैं। बालयोगी सदानंद महाराज के शिष्य पुरुषोत्तम पाटील से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बालयोगी सदानंद महाराज 12 वर्ष की उम्र में तुंगारेश्वर पर्वत स्थित परशुराम कुण्ड पर अपने मां बाप को लेकर तपस्या करने निकल पड़े थे। भयंदर-पश्चिम स्थित राई गांव के एक मध्यम वर्गीय परिवार में 29 अगस्त 1958 को पैदा हुए सदानंद महाराज में बचपन से ही संतो के लक्षण दिखने लगे थे। उनके माता-पिता गणेश पुरी बज्रेश्वरी स्थित तत्कालीन संत नित्यानंद स्वामी के शिष्य थे। उनका बालक जब दो वर्ष का हुआ तो पिता बैजनाथ अपनी पत्नी पार्वती के साथ अपने बेटे को लेकर नित्यानंद स्वामी आश्रम पर आए। स्वामी जी से बालक का नामकरण करने के लिए प्रार्थना किया। तब स्वामी ने कहा कि यह बालक हमेशा आनंद में रहेगा। इसलिए इसका नाम सदानंद पड़ गया। सदानंद को बचपन से ही नंग धड़ंग रहना, जटा जूट बढ़ाना, स्कूल जाने से मना करना, राई गांव के श्री राम मंदिर में ज्यादा से ज्यादा समय बिताना, देव भक्तों के साथ खेलना अच्छा लगता था। दो चार कक्षा पढ़ने के बाद स्कूल जाने से स्पष्ट मना कर विद्यालय को राम राम कर दिया। 12 वर्ष होते ही घर-बार छोड़कर जंगल में तपस्या करने निकल पड़े। यह घटना 27 अप्रैल 1971 की है। यह महाराष्ट्र के पहले संत हैं, जो मां-बाप को लेकर जंगल में तपस्या करने निकल पड़े थे। तुंगारेश्वर पर्वत स्थित परशुराम कुण्ड पर घास-फूस की एक झोपड़ी बनाकर वहां तपस्चर्या करने लगे। उस समय वहां घोर जंगल था। हिंसक जीव जंतु तथा विषैले सांप-बिच्छू विचरण करते थे। बचपन से ही तपस्या करने के कारण उनका नाम बालयोगी सदानंद महाराज पड़ा। आज इस बालयोगी के देश-विदेश में हजारों शिष्य हैं। परशुराम कुण्ड पर तपस्या करते करते इस संत ने जंगल की जड़ी-बूटियों का ज्ञान प्राप्त कर लिया। वे महाराष्ट्र के विभिन्न भागों में मुफ्त आयुर्वेदिक कैंप लगाकर लोगों को खूब सेवा करने लगे। आज गणेशपुरी में बाबा का मुफ्त औषधालय गरीब तथा जरूरतमंदों का मुफ्त इलाज में कार्यरत हैं। बालयोगी सदानंद महाराज ने संत ज्ञानेश्वर की ज्ञानेश्वरी की विविध भाषाओं में अनुवाद कर देश-विदेश में उसका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। शनिवार 9 अगस्त को बाबा के भक्त ब्रह्म मुहूर्त में बालयोगी का 67वां जन्मदिन ब्रह्मोत्सव के रूप में मनाने जा रहें हैं। बाबा के भक्तों को साल में एक बार ऐसा मौका मिलता है, जब वे उनके हाथ पर राखी बांध कर उन्हें स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर बालयोगी सदानंद महाराज आश्रम पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन तथा महा भंडारे का आयोजन किया गया है।

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