दिल तोड़ा मेरा
बिखर गया शामियाना
अब कहां से लाऊं रंगत की रंगीनियां
कहां से लाऊं शाम की लालिमा
सुबह की किरणें
रात की काली चादर बिछी हुई है
बिना चांद तारों के
काली घटाएं छाई है बिना शोर गुल के
डगमगा रहा आसमां बिना
चमकते सितारों के
तेरे आने का इशारा हुआ
पर देखा तो यह भ्रम था
दिल डुबाने वाला वो सितमगर था
किया क्या ऐसा कर्म था
तेरे बिछड़ने का ग़म गर्म था
कोई तो मन को समझाए
तुम्हारी राह देखना हमारा सब्र था
कैसे बताएं किस हाल में हैं
वादा निभाना हमारा फ़र्ज़ था
अन्नपूर्णा कौल, नोएडा
