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एकनाथ के वर्चस्व पर घात … भाजपाई विधायक बोला, मैं ही हूं शिंदे गुट का बाप! … महाराष्ट्र की सियासत में महाबवाल

बगावती तेवर में शिंदे गुट;
भाजपा विधायक को खुली धमकी
सामना संवाददाता / मुंबई
राजनीतिक मंच से भाजपा विधायक द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान ‘मैं ही शिंदे गुट का बाप हूं’ ने महाराष्ट्र की सियासत में नया बवाल खड़ा कर दिया है। अपने सहयोगी शिंदे गुट पर सीधा दावा ठोकने से नाराज हुए शिंदे गुट नेता अब बगावती तेवर में नजर आ रहे हैं। विधायक से माफी की मांग करते हुए संजय कुंभलकर ने चेतावनी दी है कि अगर बयान वापस नहीं लिया गया तो वे अपने स्टाइल में जवाब देंगे। ऐसे में आनेवाले दिनों में भाजपा बनाम शिंदे गुट की लड़ाई देखने को मिल सकती है। इतना ही नहीं, यह तय माना जा रहा है कि महायुति की एकता पर इस बयान का असर पड़ेगा।
यह मामला तब भड़का जब भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में बोलते हुए परिणय फुके ने कहा कि अगर किसी घर में बच्चे को अच्छे नंबर मिलते हैं तो तारीफ मां की होती है, लेकिन अगर कुछ गलत होता है तो दोष बाप पर मढ़ा जाता है। उसी दिन मुझे समझ में आया कि शिंदे गुट का भी बाप मैं ही हूं।
सतह पर अंतर्विरोध
यह बयान न सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार की सीमा लांघता दिखा, बल्कि महायुति के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को भी सतह पर ला दिया। इस बयान ने कार्यकर्ताओं की भावनाओं को आहत किया है। शिंदे गुट ने इसे सीधी तौहीन मानते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और चेतावनी दी कि ऐसे अपमानजनक वक्तव्यों पर यदि रोक नहीं लगाई गई तो परिणाम गंभीर होंगे।
बावनकुले की जुबान भी अनकंट्रोल
महाराष्ट्र के कई नेता नौटंकीबाज
राज्य की सत्ता में बैठी भाजपा महायुति के मंत्रियों की जुबानी तोपें फिर बेलगाम हो गई हैं। इस फेहरिस्त में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी जुड़ गए हैं। उनकी जुबान भी अनकंट्रोल होते हुए दिखाई दे रही है। उन्होंने मर्यादा लांघते हुए महाराष्ट्र के कई नेताओं को ‘नौटंकीबाज’ करार दिया है। उनका बयान न केवल आंदोलनरत नेताओं, बल्कि विधानसभा की गरिमा पर भी सवाल खड़ा करता है। पूर्व विधायक बच्चू कडू के आंदोलन पर निशाना साधते हुए बावनकुले ने कहा कि उन्होंने किसी को व्यक्तिगत तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन कई नेता विधानसभा में चुपचाप बैठे रहते हैं और बाहर आकर नौटंकी करते हैं।

परिणय फुके का शिंदे गुट ने किया तीखा विरोध

शिंदे गुट के नेता संजय कुंभलकर और अन्य कार्यकर्ताओं ने इस बयान पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि फुके ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो उन्हें हम अपने अंदाज में जवाब देंगे। कुंभलकर ने फुके पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने हाल ही में संपन्न जिला बैंक चुनाव में हमारे उम्मीदवार डॉ. प्रकाश मालगावे को हराने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी को छह वोट दिलवाए थे।
फडणवीस से जताई अपेक्षा
कुंभलकर ने चेतावनी दी कि अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने विधायक पर लगाम नहीं लगाई तो हम यह दिखा देगें कि असली ‘बाप’ कौन है। शिंदे गुट पहले ही फुके की आलोचना कर रहा था, लेकिन अब यह मामला खुलकर सामने आ गया है। भाजपा विधायक का यह बयान महायुति के भीतर दरार की ओर इशारा कर रहा है, जो भविष्य में गठबंधन की स्थिरता को चुनौती दे सकता है।
बावनकुले की सफाई
उधर, बावनकुले ने यह भी सफाई दी कि बच्चू कडू की ‘दांडी यात्रा’ और अनिश्चतकालीन अनशन जैसे आंदोलनों को ही उन्होंने नौटंकी कहा है, न कि व्यक्ति को। उल्लेखनीय है कि बच्चू कडू ने किसानों की कर्जमाफी को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन किया था। अनशन खत्म करवाने के लिए मुख्यमंत्री ने अमरावती के पालकमंत्री के तौर पर बावनकुले को मध्यस्थता के लिए भेजा था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की थी, जिसके बाद बच्चू कडू ने अनशन स्थगित कर दिया था।
विस्तृत चर्चा…
इस बीच बच्चू कडू के कर्जमाफी आंदोलन को लेकर बावनकुले ने दावा किया कि अब तक इस मुद्दे पर तीन अहम बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें खुद कडू शामिल रहे हैं। किस किसान को और किस पद्धति से कर्जमाफी दी जाएगी, इस पर भी विस्तृत चर्चा हुई है।
आंदोलन की शैली को नौटंकी बताया
मंत्री बावनकुले ने सफाई दी कि उन्होंने बच्चू कडू को व्यक्तिगत तौर पर नौटंकीबाज नहीं कहा, बल्कि उनके आंदोलन की शैली को नौटंकी बताया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ बच्चू कडू ही नहीं, पश्चिम महाराष्ट्र के कई नेता भी ऐसा ही करते हैं। बावनकुले ने दोहराया कि सरकार गरीब किसानों के पक्ष में है और जल्द ही कर्जमाफी पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
जीतेंद्र आव्हाड पर साधा निशाना
बावनकुले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जीतेंद्र आव्हाड पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में वोट बटोरने के लिए जानबूझकर भड़काऊ बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि जीतेंद्र आव्हाड कुछ भी बोल लें, लेकिन अब जनता उन्हें स्वीकार करनेवाली नहीं है।

बावनकुले ने कहा कि गरीब किसानों का कर्ज माफ हो, इसके लिए कमिटी बनाई गई है और आठ दिन बाद फिर बैठक होनेवाली है। इसके बावजूद, बच्चू कडू आंदोलन से पीछे नहीं हटे और मंत्रालय में घुसने की चेतावनी देकर फिर दांडी यात्रा शुरू कर दी। जब समाधान की दिशा में बातचीत चल रही है, तब इस तरह की ‘नाटकीय’ हरकतें सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही हैं।

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