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‘ईडी’ सरकार का पिछड़ा प्रेम उजागर … १००० छात्रों के हॉस्टल को मात्र २.८१ करोड़ की निधि!

विद्यार्थियों के भविष्य पर भाजपा सरकार का बुलडोजर
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई के चेंबूर इलाके में पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए शुरू किए गए १००० छात्रों की क्षमतावाले सरकारी हॉस्टल के लिए महायुति सरकार ने महज २.८१ करोड़ रुपए की फंडिंग को मंजूरी देकर विवादों को न्योता दे दिया है। एक तरफ जहां आदिवासी व पिछड़े वर्ग के छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोकलुभावन योजनाओं पर सामाजिक न्याय विभाग समेत कई विभागों के सैकड़ों करोड़ रुपयों के फंड दूसरे विभागों में ट्रांसफर किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर महायुति सरकार पर एक बार फिर पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों की उपेक्षा के गंभीर आरोप लगे हैं।
सरकार की उदासीनता उजागर
– शासकीय छात्रावासों में २३,२०८ छात्रों के लिए २३० बालक वसतिगृह और २०,६५० छात्राओं के लिए २१३ बालिका वसतिगृह शामिल हैं, लेकिन इन योजनाओं में सरकार की उदासीनता लगातार उजागर होती रही है। इसी क्रम में चेंबूर के नए हॉस्टल के लिए लोहे के पलंग, टेबल-कुर्सियां, डायनिंग टेबल-बेंच, अग्निशमन यंत्र, कंप्यूटर, सीसीटीवी और वाटर प्यूरीफायर आदि वस्तुओं की खरीद के लिए प्रस्ताव रखा गया था।
-इस पर समाज कल्याण विभाग ने ई-निविदा प्रक्रिया के तहत २.८१ करोड़ रुपए की मंजूरी दी, लेकिन इतने बड़े हॉस्टल के लिए यह राशि अपर्याप्त मानी जा रही है।
अंधकार में छात्रों का भविष्य
सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत आनेवाले चेंबूर के हॉस्टल को नाम मात्र फंड देकर छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का काम किया है। विपक्ष ने इसे सरकार की ‘दोहरी नीति’ और ‘सामाजिक न्याय विभाग पर चला बजट का बुलडोजर’ करार दिया है। सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग के अधीन राज्यभर में कुल ४४३ शासकीय छात्रावास संचालित हो रहे हैं।

सरकार की कथनी और करनी में काफी फर्क
दूसरे विभाग में फंड ट्रांसफर करने में कोई संकोच नहीं

आरोप लग रहे हैं कि महायुति सरकार लाडली बहनों के नाम पर हजारों करोड़ों रुपए के फंड को एक विभाग से दूसरे विभाग में ट्रांसफर करने में कोई संकोच नहीं कर रही है, फिर पिछड़े वर्गों के लिए बनाए गए इस हॉस्टल के लिए इस तरह की बेरुखी क्यों की जा रही है।
ठंडे बस्ते में छात्रों की
मूलभूत योजनाएं
आश्चर्य की बात यह है कि राज्य सरकार ने महिला व बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए सामाजिक न्याय विभाग से कई सौ करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। लेकिन पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए चल रही मूलभूत योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत समाज के वंचित वर्गों को नजरअंदाज करने की कोशिश मानी जा रही है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सामाजिक न्याय विभाग की योजनाओं में लगातार बजट कटौती हो रही है, जिससे पिछड़े वर्ग के छात्र शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। एक ओर सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वंचित समाज के छात्रों के लिए जरूरी फंड देने से पीछे हट रही है। इससे सरकार की कथनी और करनी में फर्क साफ नजर आता है।

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