-जैन समुदाय एवं पक्षीप्रेमियों में रोष व्याप्त
सामना संवाददाता / मुंबई
दादर में मनपा द्वारा कबूतरखाने को प्लास्टिक के त्रिपाल से ढकने और कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाने के बाद ‘कबूतरों के लिए दुविधा’ पैदा हो गई है। अचानक खाना बंद होने से कबूतरखाने में हजारों कबूतरों ने डेरा जमा लिया है। कई पक्षी सड़क पर गुजरते वाहनों से टकराकर मर रहे हैं, तो कुछ पक्षी भूख से मर रहे हैं। इससे पक्षीप्रेमियों में मनपा के खिलाफ रोष व्याप्त है। ऐसे में आम नागरिकों व जैन समुदाय की मांग है कि पक्षियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
हाई कोर्ट के आदेशानुसार, सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालना प्रतिबंधित है। इसी के तहत, दादर पश्चिम स्थित कबूतरखाने को मनपा ने बंद कर दिया है। इस अचानक कार्रवाई से कबूतरों के रहने की समस्या पैदा हो गई है। दादर स्टेशन क्षेत्र में कबूतर जहां-तहां बैठे हैं। पक्षी प्रेमी कबूतरों को दाना खिला रहे हैं, जबकि पुलिस उन्हें खदेड़ रही है। कबूतरखाना बंद होने से कबूतरों के आवास पर संकट खड़ा हो गया है।
मनपा वसूल रही है जुर्माना
प्रतिबंध के दौरान कबूतरों को दाना डालने पर ५०० रुपए का जुर्माना लगेगा, इस आशय का एक नोटिस मनपा ने कबूतरखाने के पास लगाया है। इस क्रम में मनपा ने पिछले महीने दादर कबूतरखाने में की गई कार्रवाई में ५८ लोगों पर ५०० रुपए प्रति जुर्माने के हिसाब से २५,७०० रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने पर एक व्यक्ति के खिलाफ एनसी और दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
