मुख्यपृष्ठसमाचारबेबाक-बेधड़क बोलने वाले पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक का दिल्ली में निधन

बेबाक-बेधड़क बोलने वाले पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक का दिल्ली में निधन

– प्रधानमंत्री के बड़े आलोचक रहे

रमेश ठाकुर/ नई दिल्ली

आदिवासी नेता शिबू सोरेन के बाद गरीबों की एक और मजबूत आवाज शांत हो गई। कई राज्यों के पूर्व राज्यपाल रहे चौधरी सत्यपाल मलिक का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 79 वर्ष के मलिक ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दोपहर एक बजकर 12 मिनट पर अंतिम सांस ली। वह अपने लंबे राजनीतिक जीवन में लोकसभा और राज्यसभा सदस्य के अलावा गोवा, बिहार, मेघालय और ओडिशा के राज्यपाल के पदों पर अपनी सेवाएं दी। वह लंबे समय से आईसीयू में थे। बीते दो सालों से विभिन्न बीमारियों से घिरे थे। चिकित्सकों के अनुसार उनके शरीर के तकरीबन अंगों ने पिछले दो दिनों से काम करना बंद कर दिया था।

मालूम हो, सत्यपाल मलिक उन कुछ विरले भारतीय राजनीतिज्ञों में से थे जिन्होंने सत्ता की सर्वोच्च कुर्सियों पर आसीन रहते हुए भी सत्ता के खिलाफ बोलने का साहस दिखाया। अपनी बेबाक,बेधड़क, दिलफेंक आवाज के लिए जाने जाते थे। पुलवामा आतंकी हमले को लेकर उनके खुलासे ने केंद्र सरकार को परेशानी में डाल दिया था। देश के अलावा वह जाट समुदाय में भी सर्वाधिक लोकप्रिय नेता माने जाते थे। इसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। राज्यपाल पद से हटने के बाद सत्यपाल मलिक मोदी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में से एक बन गए थे। मलिक ने बार-बार कहा कि मोदी सरकार ने किसानों को अपमानित किया और यदि सरकार ने समय पर बात सुनी होती,तो 700 से अधिक किसानों की जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने पुलवामा हमले को लेकर भी गंभीर दावा किया था कि सीआरपीएफ जवानों को एयरलिफ्ट करने की मांग खारिज नहीं की होती, तो उतनी संख्या में शहादत नहीं होती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पीएमओ भ्रष्टाचार पर आंख मूंद लेता है और वहां सच सुनने की जगह नहीं बची है। मेघालय के राज्यपाल पद पर रहते हुए उन्होंने कथित रूप से एक बड़े टेंडर घोटाले को उजागर भी किया था। कुलमिलाकर उनका राजनीतिक करिअर अंत में विभिन्न किस्म के विवादों में घिर गया था जिससे वह बहुत दुखी थे।

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