सामना संवाददाता / राजस्थान
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राजस्थान प्रदेश इकाई प्रमुख पदम जैन सहित 12 शिवसैनिकों को 26 वर्षों की लंबी न्यायिक लड़ाई के बाद न्यायालय द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया है। यह फैसला 25 जुलाई 2025 को जिला न्यायालय के न्यायाधीश धर्मराज मीणा (महिला उत्पीड़न क्रमांक -2) द्वारा सुनाया गया। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इस फैसले की अधिकृत प्रति हाल ही में प्राप्त हुई है।
यह प्रकरण वर्ष 1989 में अनंत चतुर्दशी के पर्व पर गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई सांप्रदायिक झड़पों से जुड़ा है। शिवसेना प्रदेश इकाई प्रमुख पदम जैन के अनुसार, उस समय परंपरागत जुलूस मार्ग — टिपटा, पाटन पोल, मकबरा, घंटाघर, रामपुरा और छोटी समाज घाट — को बाधित कर दिया गया था, जहां चंबल नदी में श्री गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन होता था।
वर्ष 1990 से 1999 तक शिवसेना के नेतृत्व में हर वर्ष जुलूस मार्ग को पुनः चालू करवाने के लिए आंदोलन होते रहे, इस आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी ने कभी भी साथ नहीं दिया। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस, और शिवसैनिकों की गिरफ्तारी जैसे सख्त कदम उठाए गए। अंततः, इन आंदोलनों को रोकने के प्रयास में प्रशासन द्वारा 12 शिवसैनिकों के विरुद्ध धारा 147, 149, 188 और पीडीपीपी एक्ट की धारा 3 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
10 जुलाई 2019 को निचली अदालत ने सभी आरोपियों को तीन साल के साधारण कारावास और ₹2000 के आर्थिक दंड से दंडित किया था, जिसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की गई थी। अब, अपीलीय न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। दोषमुक्त शिवसैनिकों में शामिल हैं:
पदम जैन, अनूप सोनी, रामू सैनी, राकेश मेहरा, नवल किशोर, महेंद्र सुवालका, भुवनेश, सुरेंद्र सिंह, चन्द्रशेखर, नवीन खत्री, राधेश्याम, चम्पालाल और स्व. चीनी चट्टान।
इस निर्णय के बाद शिवसैनिकों ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए इसे सत्य और न्याय की विजय बताया। पदम जैन ने कहा, “यह निर्णय दर्शाता है कि न्यायपालिका वास्तव में भारत का मजबूत स्तंभ है।” उन्होंने कहा कि इस फैसले ने चार दशकों से हिंदू हित और जनकल्याण के लिए संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं के त्याग को सम्मान दिलाया है।
इस मुकदमे की कानूनी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता रितेश सक्सेना ने नि:स्वार्थ भाव से की, जिन्होंने 26 वर्षों तक लगातार अदालती कार्यवाही में सहयोग किया।
