भरतकुमार सोलंकी /जयपुर/पाली
राजस्थान के पाली जिले के देसूरी उपखंड स्थित दूदापुरा गांव में सोमवार को सर्पदंश से दो मासूम भाइयों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि इस हृदयविदारक घटना पर पाली जिला प्रशासन के किसी भी आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पंक्ति की भी संवेदना या जरूरी सूचना तक साझा नहीं की गई।
घटना अलसुबह की है जब एक मां के पास सो रहे आठ और तीन वर्ष के दो भाई सांप के काटने से गंभीर रूप से बीमार हो गए। उन्हें पहले सादड़ी अस्पताल और फिर सुमेरपुर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन समय पर प्राथमिक चिकित्सा और विषरोधक इलाज नहीं मिलने के चलते दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।
इस हृदयविदारक त्रासदी ने एक बार फिर “डिजिटल इंडिया” के खोखलेपन को उजागर कर दिया है। पाली जिले में अधिकांश सरकारी विभागों के सोशल मीडिया हैंडल या तो निष्क्रिय हैं या फिर सिर्फ योजनाओं और आयोजनों की तस्वीरें पोस्ट करने तक ही सीमित हैं। ऐसे में सवाल उठता है—
-क्या सरकार का सोशल मीडिया पर होना सिर्फ प्रचार के लिए है?
-आपात स्थितियों में जनता को जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन क्यों नहीं मिल पाता?
-क्या तकनीक का उद्देश्य जनकल्याण नहीं, सिर्फ चेहरा चमकाना है?
मौन प्रशासन और मूक सोशल मीडिया
सर्पदंश की घटनाएं हर वर्ष मानसून में ग्रामीण क्षेत्रों में आम हैं। लेकिन जब प्रशासन की चुप्पी और व्यवस्था की लचरता मौतों की वजह बन जाए, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक उदासीनता मानी जानी चाहिए।
आज ज़रूरत इस बात की है कि: हर जिला और उपखंड स्तर पर सोशल मीडिया अकाउंट्स को जिम्मेदार और सक्रिय बनाया जाए। 24×7 आपातकालीन सूचनाएं, मौसम की चेतावनियां, प्राथमिक उपचार केंद्रों की जानकारी, दवाओं की उपलब्धता और इमरजेंसी नंबरों का नियमित प्रसार हो। ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक डिजिटल संवाद प्रणाली मजबूत और उत्तरदायी हो।
जनता को भी समझना होगा डिजिटल जिम्मेदारी
सरकारों से सवाल करना ज़रूरी है, लेकिन केवल वहीं तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं।
हर नागरिक को यह जानना और समझना होगा कि: सर्पदंश या अन्य आपातकालीन स्थिति में 108 एम्बुलेंस, PHC, ब्लॉक अस्पताल और विषरोधक दवाओं तक त्वरित पहुंच कैसे हो।
बच्चों को प्राथमिक उपचार देना और डरने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना कितना जरूरी है।
इन विषयों पर स्कूलों, पंचायतों और धार्मिक आयोजनों में नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
तकनीक का अर्थ: ज़िंदगी बचाना
यदि तकनीक का इस्तेमाल केवल योजनाओं के पोस्टर शेयर करने और नेताओं की तस्वीरें लगाने तक सीमित रह जाए, तो वह डिजिटल लोकतंत्र नहीं, डिजिटल दिखावा बन जाता है। पाली जिले की यह घटना राजस्थान समेत पूरे देश के प्रशासन के लिए चेतावनी है कि सोशल मीडिया को सिर्फ जनसंपर्क विभाग का औजार नहीं, जनसंवाद का माध्यम बनाया जाए।
जनता से अपील
अपने क्षेत्र के सरकारी सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें।
आपातकालीन नंबर सेव रखें।
जब भी कोई समस्या या घटना हो— ट्वीट करें, फेसबुक पोस्ट करें, शिकायत करें।
क्योंकि एक सजग नागरिक ही जिम्मेदार प्रशासन को जवाबदेह बना सकता है।
