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म्हाडा के नाम पर मिल मजदूरों के साथ ठगी! …निजी डेलवपर्स करवा रहे हैं फर्जी आवेदन

– मजदूर संगठनों का आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
गृह निर्माण विभाग ने शेलू और वांगणी में एक निजी डेवलपर के माध्यम से मिल मजूदरों के लिए ८१ हजार घर बनाने का पैâसला किया है। इसके अनुसार, इन घरों के लिए मिल मजदूरों से सहमति पत्र और आवेदन भरवाए जा रहे हैं। हालांकि, सहमति पत्र और आवेदन भरना स्वैच्छिक है, लेकिन मिल मजदूरों और ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया है कि वांगणी में ५१ हजार घरों के निर्माण का जिम्मेदारी संभालने वाला डेवलपर्स, म्हाडा के नाम पर मिल मजदूरों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है।
डेवलपर्स के एक कर्मचारी ने मजदूरों से फोन पर संपर्क किया और कहा कि वह म्हाडा कार्यालय से बोल रहा है, आपने म्हाडा में झूठी जानकारी दी है, उनसे अवैध रूप से ओटीपी हासिल किए और सहमति पत्र और आवेदन भरवाए। डेवलपर म्हाडा के लोगों का भी अवैध रूप से इस्तेमाल कर रहा है और यह दिखावा कर रहा है कि मिल मजदूरों की परियोजना हमारे माध्यम से म्हाडा द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।
मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत
इतना ही नहीं, मिल मजदूरों के संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि इस डेवलपर ने मिल मजदूरों के नाम पर फर्जी आवेदन जमा किए हैं। इस बात की भी संभावना है कि इसके लिए फर्जी आधार कार्ड नंबर और बैंक खाता नंबर का इस्तेमाल किया गया होगा। इस पृष्ठभूमि में कुछ मिल मजदूर संगठन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास इस डेवलपर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगे।
कुल ८० हजार घरों का है ठेका
मुंबई में डेढ़ लाख मिल मजदूरों के लिए घर बनाने की जगह नहीं है। सरकार ने वांगणी में ५१ हजार घर बनाने का ठेका एक डेवलपर समूह को और शेलू में ३० हजार घर बनाने का ठेका एक अन्य डेवलपर को दिया है। कुछ मजदूर संगठनों ने इन दोनों जगहों पर घरों का विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ संगठन वांगणी के घरों का विरोध कर रहे हैं। डेवलपर्स मिल मजदूरों को धोखा देकर आवेदन भरवा रहे हैं।

 

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