द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई में कबूतरों के बसेरे को लेकर मुंबई मनपा की कार्रवाई धीमी गति से चल रही है। मुंबई हाई कोर्ट के आदेश के बाद दादर कबूतरखाना को प्लास्टिक के तिरपालों से ढंक दिया गया, लेकिन शहर के अन्य हिस्सों में कबूतरों को अभी भी दाना दिया जा रहा है। हाई कोर्ट ने आदेश में कहा था कि मुंबई के ५१ कबूतरखानों को बंद किया जाए और सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
कबूतरों के मल और पंखों से पैâलने वाली बीमारियों जैसे कि श्वसन संबंधी समस्याएं और संक्रमण लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसे देखते हुए बीएमसी को उन सभी क्षेत्रों का जायजा लेना और कार्रवाई करना आवश्यक है, जहां कबूतरों को दाना डाला जा रहा है।
कबूतरों से होने वाले खतरे:
– श्वसन संबंधी समस्याएं: कबूतरों की बीट और पंखों से फेफड़ों की बीमारी हो सकती है।
– संक्रमण: कबूतरों के मल और पंखों से संक्रमण फैल सकता है।
– एलर्जी: कबूतरों के पंखों और बीट से एलर्जी हो सकती है।
कई संगठनों का विरोध
बीएमसी ने दादर कबूतरखाना को बंद करने के बाद अब तक कई लोगों पर जुर्माना लगाया है और कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। हालांकि, जैन समुदाय और अन्य धार्मिक संगठन इस पैâसले का विरोध कर रहे हैं और कबूतरों को दाना खिलाने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं।
