अजय भट्टाचार्य
समाचार एजेंसी रायटर्स ने रक्षा अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत-पाक जंग में राफेल का प्रदर्शन या उसकी कथित तौर पर खराब गुणवत्ता मुख्य समस्या नहीं थी इसके गिर जाने की मुख्य वजह जे-१० लड़ाकू विमान से दागी गई चीन निर्मित पीएल-१५ मिसाइल की मारक क्षमता के बारे में भारतीय खुफिया जानकारी की विफलता थी। मत भूलिए देश की खुफिया एजेंसियां गृह मंत्रालय के अधीन हैं। रायटर्स की रिपोर्ट कहती है कि पीएल १५ मिसाइल की जानकारी का पता न होने से भारत के पायलटों को लगा कि वे पाकिस्तान की वायु सुरक्षा प्रणाली की जद में नहीं हैं, जबकि असल में ऐसा नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन में तकरीबन ११० विमान शामिल थे। अगर वास्तव में खुफिया तंत्र विफल हुआ है तो यह चिंताजनक है।
कमजोर कांच की बोतल
प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की गुजरात सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अपने ही गलियारों में लड़खड़ा गई है। हाल ही में एक स्टार्टअप ने सचिवालय परिसर में कांच की बोतलों से पेयजल सुविधा स्थापित की। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस पहल का उद्घाटन किया था, लेकिन पारंपरिक छोटी प्लास्टिक की बोतलों का ही बोलबाला है। केवल चौथी मंजिल पर स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने ही कांच की बोतलों को अपनाया है। एक वरिष्ठ मंत्री ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया, ‘हम वास्तव में इनका उपयोग नहीं कर सकते। कांच की बोतलें भारी होती हैं और एक बार खुलने के बाद पानी अक्सर बर्बाद हो जाता है।’ जाहिर है, मंत्री जी को अपने बजट का ध्यान भी रखना है।
निगरानी मंत्री
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी के मिशन से पुलिस महकमा सकते में है। अपने लगातार सोशल मीडिया अपडेट और प्रेस नोट के लिए जाने जानेवाले सांघवी अब राज्य भर के पुलिस इंस्पेक्टरों के लिए ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार कर रहे हैं। उनकी टीम हर इलाके के प्रमुख नागरिकों से उनके स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर के बारे में प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क कर रही है। यह कवायद पुलिस हलकों में चर्चा का विषय बन गई है और कई अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे क्या होगा। मंत्री पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के बारे में बिना किसी रोक-टोक के, प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)
