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कार्यकर्ता बैठक बनी कुश्ती का अखाड़ा …शिंदे गुट में `गुंडागर्दी’ का लाइव शो! …भिड़े नेता, सभागार में गूंजी गालियां, उड़ गई मर्यादा

– `अबे तू बाहर आ!’ से `तेरे घर आता हूं’ तक हुई धमकीबाजी

सामना संवाददाता / मुंबई
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरम है। इस चुनाव में सफलता की लालसा में शिंदे गुट भी तैयारियों में जुटा है। हालांकि, शिंदे गुट अब अंदरूनी कलह की आग में झुलसता दिख रहा है। बीड जिले के करमाला में हुई कार्यकर्ता बैठक उस वक्त शर्मनाक तमाशे में तब्दील हो गई, जब मंच पर ही दो गुटों के नेता आपस में भिड़ गए और बैठक देखते ही देखते कुश्ती का अखाड़ा बन गया।
बैठक जिस सभागृह में चल रहा था, उसमें गालियां गूंज उठीं। इसी के साथ ही इस दौरान सभी मर्यादाएं हवा में उड़ गईं। इस बीच ‘अबे तू बाहर आ!’ से लेकर ‘तेरे घर आता हूं!’ जैसे शब्दों में धमकीबाजी तक हुई। इस गूंज ने पूरी बैठक को गुंडागर्दी के लाइव शो में बदल दिया। मर्यादा तार-तार हुई, पार्टी की छवि को तगड़ा झटका लगा और यह साफ हो गया कि चुनाव से पहले ही शिंदे गुट बिखरने के कगार पर है।
पंढरपुर जिले के करमाला में शिंदे गुट की ओर से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य आगामी निकाय चुनावों की रणनीति तय करना था। लेकिन मंच पर ही पूर्व विधायक श्यामला ताई बागल के बेटे दिग्विजय बागल और शिंदे गुट समर्थक महेश चिवटे के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बागल ने शिकायत की कि वे पार्टी के विस्तार के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन शिंदे गुट के जिलाप्रमुख उन्हें विश्वास में नहीं ले रहे हैं। यह शिकायत उन्होंने सीधे शिंदे गुट के निरीक्षकों से की, जिससे महेश चिवटे भड़क गए। साथ ही चिवटे ने बागल पर गंभीर आरोप लगाए कि उनकी बहन भाजपा में है, जबकि वे खुद हमारे गुट में हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि बागल परिवार ने दोनों चीनी मिलों को लूट लिया।
मंच पर अराजकता का प्रदर्शन
बागल ने इसका पलटवार करते हुए चिवटे को धमकी दी कि तू बाहर आ, तू करमाला में आ, तुझे दिखाता हूं। जवाब में चिवटे भी बोले पड़े कि जो देखना है, देख ले। करमाला क्या, तेरे मोहल्ले में भी आऊंगा। आरोप-प्रत्यारोप के दौर में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों नेताओं ने खुलेआम एक-दूसरे को धमकियां देना शुरू कर दिया। यह देख मौके पर मौजूद कार्यकर्ता भी स्तब्ध रह गए कि मंच पर इस तरह की अराजकता का प्रदर्शन कैसे हो सकता है।
खुलेआम सामने आने लगी है कलह
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने भी इस शर्मनाक तमाशे को शांत कराने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपशब्दों की बौछार करते नेताओं को रोकने के बजाय अन्य पदाधिकारी तमाशबीन बने बैठे रहे। इससे साफ जाहिर है कि शिंदे गुट के भीतर अनुशासन की हालत बदतर हो चुकी है और अंदरूनी कलह अब सड़कों से लेकर सभागार तक खुलेआम सामने आने लगी है।

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