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दहीहंडी के चंदे पर भी फंदा! …बिना अनुमति की वसूली तो होगी जेल

ईडी सरकार ने उत्सवों पर भी लगाया ‘आपातकाल’
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
इस साल दहीहंडी, गणेशोत्सव और नवरात्र जैसे सार्वजनिक आयोजनों में चंदा लेने की योजना बना रहे मंडलों और संस्थाओं के लिए अब सतर्क हो जाने का समय है। महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम की नई सख्तियों के तहत अब बिना धर्मादाय आयुक्त की पूर्व अनुमति के चंदा इकट्ठा करना गैरकानूनी माना जाएगा।
चंदा जमा करने में नियमों का उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की जेल और जमा राशि की डेढ़ गुनी रकम का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही नहीं, आयोजन के बाद आय-व्यय का हिसाब देना भी अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में नियमों की अनदेखी करनेवाले मंडलों को अब भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
धर्मादाय विभाग के नियम
 धर्मादाय विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं मंडलों को अनुमति से छूट दी गई है, जिन्होंने ट्रस्ट के रूप में स्थाई रूप से पंजीकरण कराया है।
 ऐसे पंजीकृत मंडलों को अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन उनके लिए हर वित्तीय वर्ष का पूरा हिसाब-किताब ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य रहेगा।
 नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित मंडल या संस्था पर कार्रवाई की जा सकती है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो मंडल या संस्थाएं अभी तक धर्मादाय विभाग में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें ट्रस्ट कानून की धारा ४१(क) के तहत चंदा इकट्ठा करने के लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है।
 आवेदन स्वीकृत होने के बाद ही रसीद पर स्वीकृति क्रमांक अंकित कर चंदा लिया जा सकेगा।
 आयोजन समाप्त होने के बाद एक निश्चित समय सीमा में आय-व्यय का संपूर्ण विवरण धर्मादाय कार्यालय में प्रस्तुत करना भी आवश्यक होगा।

सार्वजनिक उत्सवों के दौरान
चंदा एकत्र करने में पारदर्शिता जरूरी

धर्मादाय विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक उत्सवों के दौरान चंदा एकत्र करने में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अगर किसी मंडल के बारे में चंदे की हेरा-फेरी या वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। नए दंडात्मक प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और पंजीकरण रद्द करने की नौबत भी आ सकती है।
सभी मंडल करें कानून का पालन
धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने सभी मंडलों से अपील की है कि वे कानून का पालन करते हुए समय पर ऑनलाइन आवेदन करें और चंदा व खर्च का पूरा विवरण आयोजन के बाद जमा करें। रसीद पर धर्मादाय कार्यालय की मंजूरी संख्या अनिवार्य रूप से दर्ज होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जांच या विवाद से बचा जा सके। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि मंडलों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

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